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Retail inflation: सितंबर में बढ़कर 7.34 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पादन में 8 प्रतिशत की गिरावट

By भाषा | Updated: October 12, 2020 19:40 IST

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर सितंबर में 10.68 प्रतिशत रही जो अगस्त में 9.05 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत दर पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रस्फीति पर गौर करता है। 

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ठळक मुद्देउपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अगस्त में 6.69 प्रतिशत और सितंबर 2019 में यह 3.99 प्रतिशत थी।विनिर्माण, खनन और बिजली उत्पादन क्षेत्र में उत्पादन कम रहने से अगस्त माह में औद्योगिक उत्पादन में 8 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। खनन क्षेत्र में 9.8 और बिजली क्षेत्र के उत्पादन में 1.8 प्रतिशत की गिरावट रही है।

नई दिल्लीः खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर महीने में बढ़कर 7.34 प्रतिशत रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अगस्त में 6.69 प्रतिशत और सितंबर 2019 में यह 3.99 प्रतिशत थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर सितंबर में 10.68 प्रतिशत रही जो अगस्त में 9.05 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत दर पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रस्फीति पर गौर करता है। 

विनिर्माण, खनन और बिजली उत्पादन क्षेत्र में उत्पादन कम रहने से अगस्त माह में औद्योगिक उत्पादन में 8 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर आधारित इन आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2020 में एक साल पहले के मुकाबले विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में 8.6 प्रतिशत गिरावट आई है जबकि खनन क्षेत्र में 9.8 और बिजली क्षेत्र के उत्पादन में 1.8 प्रतिशत की गिरावट रही है। एक साल पहले अगस्त में भी आईआईपी में 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

पहले के माह के प्रदर्शन के साथ तुलना करना उचित नहीं होगा

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘‘कोविड- 19 महामारी फैलने के बाद के महीने के आंकड़ों को इस महामारी के प्रसार से पहले के माह के प्रदर्शन के साथ तुलना करना उचित नहीं होगा।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘प्रतिबंधों में धीरे धीरे दी गई ढील के बाद आर्थिक गतिविधियों में भी उसी के अनुरूप सुधार आया है। यह सुधार अलग अलग स्तर पर और आंकड़ों की रिपोर्टिंग में भी आया है।’’

आईआईपी के अगस्त के आंकडे जारी होने के साथ ही मई के आईआईपी के आंकड़ों को संशोधित कर शुरुआती 33.9 प्रतिशत की गिरावट से 33.4 प्रतिशत की गिरावट किया गया है। वहीं जून 2020 में आईआईपी में 15.8 प्रतिशत की गिरावट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश में कोविड- 19 महामारी का प्रसार होने के साथ ही सरकार ने 25 मार्च 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन लागू कर दिया था। इसके बाद करीब दो महीने तक आर्थिक गतिविधियां जैसे थम सी गई थी।

यही वजह है कि अप्रैल 2020 में आईआईपी में 57.3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान जरूरी गतिविधियों को छोड़कर अन्य सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ताजा आंकड़ों के मुताबिक आईआईपी में 77.63 प्रतिशत का योगदान रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र में अगस्त 2020 में 8.6 प्रतिशत की गिरावट रही। एक साल पहले इस क्षेत्र में 1.7 प्रतिशत की गिरावट रही दर्ज की गई थी। वहीं खनन क्षेत्र के उत्पादन में इस दौरान 9.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।

विद्युत उत्पादन एक साल पहले के 0.9 प्रतिशत के मुकाबले 1.8 प्रतिशत गिरा है। पूजीगत सामान का उत्पादन इस दौरान 15.4 प्रतिशत घटा है जिसमें एक साल पहले अगस्त में 20.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। टिकाऊ उपभोक्ता सामान के उत्पादन में भी 10.3 प्रतिशत की गिरावट आई है।

गैर- टिकाऊ उपभोक्ता सामानों का उत्पादन भी 3.3 प्रतिशत घटा है। आंकड़ों के मुताबिक इस साल अप्रैल से अगस्त के पांच माह के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की यदि बात की जाये तो इसमें 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि एक साल पहले इन पांच माह में समग्र रूप से इसमें ढाई प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

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