नई दिल्लीः पेंशन फंड नियामक PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को और मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। PFRDA (पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण) ने यह कदम पेंशन के बढ़ते महत्व और देश के नागरिकों की भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाए हैं।
1. बैंक अब खुद चला सकेंगे पेंशन फंड
PFRDA के बोर्ड ने अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) को स्वतंत्र रूप से अपने पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इसका मकसद पेंशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा (Competition) को बढ़ाना और ग्राहकों को बेहतर विकल्प देना है। केवल वही बैंक इसमें शामिल हो पाएंगे जो नेट वर्थ, मार्केट कैपिटलाइजेशन और वित्तीय मजबूती के मामले में RBI के कड़े नियमों पर खरे उतरेंगे।
2. फीस स्ट्रक्चर में बदलाव (1 अप्रैल 2026 से लागू)
निवेशकों के हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस (IMF) में बदलाव किया गया है।
यह नई दरें गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए इस प्रकार होंगी:
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) की सीमा - नई IMF दरें
25,000 करोड़ रुपये तक - 0.12%25,000 से 50,000 करोड़ रुपये तक - 0.08%50,000 से 1,50,000 करोड़ रुपये तक - 0.06%1,50,000 करोड़ रुपये से अधिक - 0.04%
यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए कुछ खास स्कीमों में फीस पहले जैसी ही रहेगी।
जागरूकता और शिक्षा पर जोर
पेंशन फंड द्वारा PFRDA को दी जाने वाली 0.015% की वार्षिक नियामक फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, इसका एक हिस्सा (0.0025%) अब NPS इंटरमीडियरीज एसोसिएशन को दिया जाएगा, ताकि लोगों के बीच पेंशन के प्रति जागरूकता और वित्तीय साक्षरता बढ़ाई जा सके। PFRDA को उम्मीद है कि इन सुधारों से NPS इकोसिस्टम अधिक सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनेगा, जिससे आखिरकार आम नागरिक को रिटायरमेंट के बाद बेहतर आय सुरक्षा मिलेगी।
NPS ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति
NPS ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है:
1. दिनेश कुमार खारा: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व चेयरमैन। इन्हें NPS ट्रस्ट बोर्ड का अध्यक्ष (Chairperson) भी बनाया गया है।2. स्वाति अनिल कुलकर्णी: UTI AMC की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष।3. डॉ. अरविंद गुप्ता: डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक।