जम्मूः वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर ने कश्मीर के वसंत पर्यटन पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। श्रीनगर के बादामवारी और ट्यूलिप गार्डन में फूल पूरी तरह खिले हुए हैं, लेकिन पर्यटकों की संख्या उम्मीद से कम नजर आ रही है। भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट की आशंका के चलते कई पर्यटक अपनी यात्रा टाल रहे हैं, जिससे पर्यटन कारोबार को झटका लगा है।इससे कश्मीर में पर्यटन से जुड़े व्यवसाय को नुकसान पहुंचा है। माना जा रहा है कि यह स्थिति कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को एक और गहरा जख्म देने वाली है।
साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने और तीन दशकों के आतंकवाद के बाद, कश्मीर का पर्यटन 2022 से 2024 तक लगातार तीन वर्षों तक सुधार की राह पर था और हर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ रही थी। ईरान-अमेरीका युद्ध शुरू होने के बाद अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को छोड़कर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति सीमित कर दी गई है।
इससे होटलों की सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। एक होटल मालिक ने बताया कि गैस की कमी के कारण कई होटलों ने अपना मेनू छोटा कर दिया है और अगर हालात नहीं सुधरे तो सेवाएं पूरी तरह रोकनी पड़ सकती हैं। हालांकि दो दिन पहले मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कहा गया कि केंद्र शासित प्रदेश में स्टाक की स्थिति स्थिर है।
सरकारी बयान के अनुसार, पेट्रोल का स्टाक 9-10 दिन, डीजल 16-17 दिन और एलपीजी 12-13 दिनों के लिए पर्याप्त है। घरेलू एलपीजी की मांग 100 परसेंट पूरी की जा रही है और शहरी क्षेत्रों में 24 दिन व ग्रामीण क्षेत्रों में 35 दिनों का बैकअप मौजूद है। कश्मीर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन प्रतिनिधिमंडल ने डिविजनल कमिश्नर से मुलाकात कर आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कुछ रियायतें मांगीं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना कहते थे कि लोग घबराहट में एडवांस बुकिंग कर रहे हैं जिससे मांग बढ़ गई है। उनका कहना था कि ज्यादातर घरों में पहले से ही 5-6 सिलेंडर का स्टाक होता है, लेकिन किल्लत के डर से लोग उन्हें भी भरकर रखना चाहते हैं। पर पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग अब डरे हुए हैं कि इस स्थिति का आने वाले सीजन पर क्या असर पड़ेगा।
इस साल पर्यटन सीजन की आधिकारिक शुरुआत 14 मार्च को बादामवारी और 16 मार्च को ट्यूलिप गार्डन के उद्घाटन के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की थी। पिछले साल पर्यटकों की संख्या गिरकर 11.16 लाख रह गई थी। अब यह कितनी गिरेगी कोई नहीं जानता अगर युद्ध नहीं रुका तो।