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पिछले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 3.39 फीसद रहा, खर्च हुआ कम

By भाषा | Updated: June 1, 2019 02:50 IST

राजकोषीय घाटे के आंकड़े हालांकि बढ़े हैं लेकिन जीडीपी के बढ़े आंकड़े से इसकी तुलना करने पर यह 3.39 प्रतिशत रहा है। महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.39% रहा।

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सरकार खर्च में कमी और कर के अलावा अन्य मदों से प्राप्त होने वाले राजस्व में वृद्धि के चलते वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा बजट के संशोधित अनुमान 3.4 प्रतिशत के मुकाबले मामूली कम 3.39 प्रतिशत पर रखने में सफल रही। आंकड़ों के संदर्भ में कहा जाए तो 31 मार्च 2019 के अंत में राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि बजट में राजकोषीय घाटे के 6.34 लाख करोड़ रुपए रहने का संशोधित अनुमान रखा गया था।

राजकोषीय घाटे के आंकड़े हालांकि बढ़े हैं लेकिन जीडीपी के बढ़े आंकड़े से इसकी तुलना करने पर यह 3.39 प्रतिशत रहा है। महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.39% रहा। हालांकि, वास्तविक आंकड़ों में राजकोषीय घाटा बढ़ा है, लेकिन जीडीपी बढ़ने के कारण इसकी तुलना में राजकोषीय घाटा का अनुपात कम हुआ है।

वित्त वर्ष 2018-19 में वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर जीडीपी 11.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ करीब 190.10 लाख करोड़ रुपये रही है। वित्त वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 170.95 करोड़ रुपये रहा था। इस लिहाज से राजकोषीय घाटे का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले बढ़ने के बावजूद बढ़ी हुई जीडीपी के समक्ष कम रहा है।

पिछले वित्त वर्ष में कर के अलावा अन्य स्रोतों से 2.46 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो बजट के 2.45 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि, कर से प्राप्त राजस्व बजट के संशोधित अनुमान की तुलना में कम रहा है। इस दौरान कर से 13.16 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि संशोधित अनुमान में इसके 14.84 लाख करोड़ रुपये की बात कही गयी थी।

वित्त वर्ष 2018- 19 के दौरान कुल प्राप्तियां 16.66 लाख करोड़ रुपये रहीं। जबकि संशोधित अनुमानों में 18.22 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति होने का अनुमान लगाया गया था। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान पूंजी एवं राजस्व व्यय में कमी के चलते कुल व्यय घटकर 23.11 लाख करोड़ रुपये रहा। जबकि बजट के संशोधित अनुमानों में सरकार ने 24.57 लाख करोड़ रुपये का कुल खर्च रहने का अनुमान जताया था। वित्त वर्ष 2019-20 में भी राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

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