BSNL is in red, not making a profit like other | खराब होती जा रही BSNL की हालत, बढ़ता जा रहा घाटा, रिलायंस JIO की बल्ले-बल्ले
खराब होती जा रही BSNL की हालत, बढ़ता जा रहा घाटा, रिलायंस JIO की बल्ले-बल्ले

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के राजस्व में पिछले दो साल के दौरान तेज गिरावट आई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीएसएनएल ने मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीनों (अप्रैल 2018-जनवरी 2019) में जीएसएम मोबाइल फोन सेवा से 4,000.81 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल के आंकड़ों की तुलना से पता चलता है कि दो साल पहले यानी वित्त वर्ष 2016-17 की समाप्ति तक जीएसएम मोबाइल फोन सेवा से बीएसएनएल का राजस्व पांच अंकों में दस हजार करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर था। 

वित्त वर्ष 2017-18 से दूरसंचार कंपनी की कमाई में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। हर साल बीएसएनएल का घाटा बढ़ता जा रहा है। इसने वित्त वर्ष 2018 के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया, जबकि वित्त वर्ष 2017 में यह 4,786 करोड़ रुपये था।

मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने पीटीआई को बताया कि उन्हें आरटीआई के जरिए बीएसएनएल से यह जानकारी मिली है। गौड़ की आरटीआई अर्जी पर भेजे गये जवाब में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसएनएल ने जीएसएम मोबाइल फोन सेवा से 7,148.09 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया था। 

उन्होंने कहा, आरटीआई के तहत मिले इन आंकड़ों पर गौर करने से संकेत मिलता है कि बीएसएनएल का मौजूदा वित्त वर्ष में कमाई के मामले में पिछले वित्त वर्ष के स्तर पर पहुंचना आसान नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, बीएसएनएल ने वित्त वर्ष 2016-17 में 11,215.61 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2015-16 में 11,182.53 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2014-15 में 10,890.35 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया था।

कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रही BSNL 
हाल में ही खबर आई कि वित्तीय संकट से जूझ रही बीएसएनएल ने अभी तक अपने करीब 1.76 लाख कर्मचारियों को फरवरी की सैलरी नहीं दी है। कर्मचारी संघ ने दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सरकार वेतन देने के बीएसएनएल को फंड जारी करे। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी की हालत सुधारने के लिए भी आग्रह किया है। अपनी माँगों को लेकर कंपनी के कर्मचारी धरना-प्रदर्शन भी करते रहे हैं। 

कर्मचारियों को जबरन छुट्टी देने को मजबूर क्यों BSNL?
बीएसएनएल करीब 35 हज़ार कर्मचारियों-अफसरों को ज़बरन वीआरएस देने को मजबूर है। उसने टीए-डीए, मेडिकल अर्न्ड लीव, पीएफ, ग्रेच्युटी, बोनस आदि सब फ़्रीज कर दिए हैं। बीती तिमाही में उसने दो हज़ार करोड़ का घाटा दर्ज़ किया है, उसका 15% रेवेन्यू कम हो गया है। इन कर्मचारियों को वीआरएस पर भेजने के लिये बीएसएनएल को करीब तेरह हजार करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। 

जियो के अलावा तबाह के रास्ते बाकी टेलीकॉम
रिलांयस जियो के अलावा देश का पूरा टेलीकॉम सेक्टर तबाही के रास्ते पर है। दर्ज़न भर से ज़्यादा टेलीकॉम सेक्टर की प्राइवेट कंपनियों की जगह अब कुल तीन कंपनियाँ बची हैं। सबसे आगे जियो, दूसरे नंबर पर वोडाफोन और आइडिया इसके बाद भारती टेलीकॉम एयरटेल है।


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