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Dosti ke side effects Movie Review: घिसी पिटी कहानी को पेश करती है सपना चौधरी की पहली ही फिल्म

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: February 8, 2019 10:46 IST

हरियाणवी सिंगर, डांसर और 'बिग बॉस' से फैंस के बीच एक नई पहतान बनाने वाली सपना चौधरी अब फैंस के बीच अपनी पलली फिल्म दोस्ती के साइड इफेक्ट्स लेकर आई हैं।

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कलाकार-सपना चौधरी,विक्रांत आनंद,नील मोटवानी,जुबैर के. खान,अंजू जाधव निर्देशक हादी अली अबरार मूवी अवधि2 घंटा 10 मिनटस्टार-डेढ स्टार

हरियाणवी सिंगर, डांसर और 'बिग बॉस' से फैंस के बीच एक नई पहतान बनाने वाली सपना चौधरी अब फैंस के बीच अपनी पलली फिल्म दोस्ती के साइड इफेक्ट्स लेकर आई हैं। निर्देशक हादी अली अबरार ने दोस्ती के साइड इफेक्ट्स में सपना को एक नए रूप में फैंस के सामने पेश किया है। मगर परेशानी ये हुई कि सपना को कॉलेज स्टूडेंट, डांसर, पुलिसवाली जैसे हर रूप में फिट करने के चक्कर में कहानी में इतने टर्न और ट्विस्ट डाले कि सभी किरदार हास्यास्पद बन कर रह गए। अगर आप भी सपना के फैंस हैं और नहीं भीं हैं और फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो थिएटर में जाने से पहले हमारा रिव्यू पढ़ें-

क्या कहती है फिल्म की शुरुआत

फिल्म की शुरुआत होती है सृष्टि (सपना चौधरी), रणवीर (विक्रांत आनंद), गौरव (जुबैर ए. खान) और अवनी ( अंजू जाधव) बचपन के बहुत ही करीबी दोस्तों से। लेकिन कुछ खराब कारणों के कारण से सभी दोस्तों तो बिछड़ना पड़ता है। किस्मत को कुछ और मंजूर होता है और ये दोस्त एक बार फिर से कॉलेज में मिल जाते हैं। यहां सृष्टि के ईमानदार पिता को पेपर लीक करने के झूठे केस में फंसा कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है। जिसके बाद सृष्टि खुद पुलिसवाली बनकर इंसाफ के लिए लड़ती हैं। यहां से दोस्तों में गलतीफहमी का दौर भी शुरू होता है और उसके बाद कहानी एक ऐसे कलाइमैक्स पर पहुंचती है, जहां आप भौंचक्के होकर सोच में पड़ जाते हैं कि यह क्या हो गया। दोस्ती पर इससे पहले भी कई फिल्में बनी हैं, मगर निर्देशक हादी अली अबरार ने बेसिर-पैरवाली दोस्ती की कहानी को लचर स्क्रीनप्ले और ऊट-पटांग चरित्रों से भरकर फिल्म का सारा मजा किरकिरा कर दिया। 

फिल्म का कमजोर पार्ट

मूवी का निर्देशक व कहानी, पात्र, गीत-संगीत किसी भी पक्ष पर अपनी पकड़ नहीं बना सके हैं। अगर सपना की ही बात की जाए तो फिल्म में उनके कई करिदार दिखाए गए हैं और वह बहुत से रूपों में नियंत्रण से बाहर जाती दिखी हैं।  क्लाइमैक्स में दर्शकों को शॉक ट्रीटमेंट देने के चक्कर में वे उसे फनी बना बैठे। 

अभिनय

सृष्टि के रूप में सपना चौधरी ने पूरी कोशिश की कि वे दर्शकों का मनोरंजन कर सकें। पर्दे पर सपना ने खुद को मजबूती से पेश करने की कोशिश की है।  लोड्रामा के कारण कोई भी अदाकार अपने रोल के साथ न्याय नहीं कर पाया। कोई भी गाना उनके लोकप्रिय गानों जितना दमखम नहीं दिखा पाया। 

क्यों देखें: आप अगर सपना चौधरी के फैन नहीं हैं, तो यह फिल्म कतई न देखें। 

टॅग्स :सपना चौधरीफिल्म समीक्षा
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