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अश्विनी महाजन का ब्लॉगः व्यापार युद्ध से भारत को फायदा 

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 13, 2019 14:55 IST

आयात शुल्क लगाने से मध्यम वर्ग के लिए कई साजोसामान अब महंगे हो गए हैं, लेकिन ऐसा होने से यदि देश में इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलता है तो मध्यम वर्ग को होने वाले इस अल्पकालिक नुकसान की भरपाई देश में उत्पादन और रोजगार को बढ़ाने से हो जाएगी. 

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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा शासन सूत्र संभालने के बाद शेष दुनिया से आने वाले आयातों पर अब अमेरिका ने भारी आयात शुल्क लगाना शुरू किया है. उसकी देखादेखी अन्य देशों ने भी इस प्रकार से आयात शुल्क बढ़ाए हैं. ऐसे में दुनिया में एक व्यापार युद्घ का आगाज हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत उन कुछ चुनिंदा देशों में शामिल है जिसे वर्तमान में चल रहे व्यापार युद्घ से खासा लाभ होने वाला है. रिपोर्ट का कहना है कि हालांकि इस व्यापार युद्घ से वैश्विक व्यापार में भारी कमी आएगी लेकिन भारत का निर्यात 3.5 प्रतिशत बढ़ सकता है.

चीन से आने वाले सामानों के कारण न केवल देशों का व्यापार घाटा बढ़ा बल्कि उसके चलते विदेशी भुगतान का भारी संकट भी आ गया है. आज जब अमेरिका और कुछ अन्य देश व्यापार युद्घ में कूदकर अपने आयातों पर आयात शुल्क बढ़ा रहे हैं, ऐसे में भारत जैसे देशों को एक अवसर मिला है कि वे भी अपने उन उद्योगों को पुनर्जीवित कर सकें जो सस्ते आयातों के कारण बंद होने को मजबूर हो गए थे. गौरतलब है कि जिस ग्लोबल सप्लाई चेन पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने की बात हो रही है, भारत तो उसका हिस्सा बन ही नहीं पाया. सर्वविदित है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरणों के कलपुर्जे भी भारत में नहीं बनते.

चीन के माल पर अमेरिका द्वारा रोक लगाने से जिस ग्लोबल सप्लाई चेन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, वो दक्षिण-पूर्व एशियाई देश हैं. भारत में ऑटो-मोबाइल, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता वस्तुओं आदि के उत्पादन में विदेशी कंपनियां अधिकांशत: कलपुर्जे विदेशों से ही मंगाती हैं. इस व्यापार युद्घ में भारत के पास एक संभावना है कि नई परिस्थितियों में भारत में मैन्युफैरिंग में बढ़ावा मिल सके. पिछले एक साल में सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने के कारण आयातों पर असर पड़ना शुरू हो गया है और हमारा व्यापार घाटा बढ़ने से रुका है, जिससे रुपए के अवमूल्यन को थामने में भी मदद मिली है. शायद यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र ने कहा है व्यापार युद्घ से भारत को खासा फायदा होगा.

यह बात सही है कि आयात शुल्क लगाने से मध्यम वर्ग के लिए कई साजोसामान अब महंगे हो गए हैं, लेकिन ऐसा होने से यदि देश में इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलता है तो मध्यम वर्ग को होने वाले इस अल्पकालिक नुकसान की भरपाई देश में उत्पादन और रोजगार को बढ़ाने से हो जाएगी. 

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