असली सवाल भूखे मरने या पेट भरने का नहीं है बल्कियह है कि भारत के नागरिकों की खुराक यथायोग्य है या नहीं? यानी उन्हें ऐसा भोजन मिलता है या नहीं कि जिससे वे सबल, सचेत और सक्रिय रह सकें?
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लोकमत नागपुर संस्करण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय अंतरधर्मीय सम्मेलन में ‘धार्मिक सौहाद्र्र के लिए वैश्विक चुनौतियां और भारत की भूमिका’ विषय पर हुई परिषद में दि आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणोता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के संबोधन के संपादित अ
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कांग्रेस को जेंडर का लाभ उन्हीं राज्यों में मिलता था जहां उसका हमेशा वर्चस्व रहा है. उसे जेंडर की यह बढ़त उन राज्यों में उस तरह हासिल नहीं होती जहां राजनीति ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक रहती है
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पहले कश्मीरी पंडितों का मुस्लिम बहुल कश्मीर से हिंदू आबादी वाले जम्मू की ओर पलायन शुरू हुआ. फिर प्रवासी मजदूर भागने लगे, जब बिहार और यूपी के दो मजदूरों की हत्या हो गई. मुख्य रूप से अल्पसंख्यकों को आतंकवादी निशाना बना रहे हैं, जिन्हें कश्मीर के मूल बा
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हमारी सरकार का यह रवैया अजीब-सा है कि शराब की दुकानें तो वह खुलेआम चलने दे रही है लेकिन लगभग 300 नशीली दवाओं के सेवन पर उसने कानूनी प्रतिबंध लगा रखा है।
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बांग्लादेश के सांप्रदायिक सौहार्द पर गहरा आघात लगाने वाले इन दंगों के भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर भी छाया डालने का अंदेशा रहा. हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने पर पूरी तरह से संवेदनशीलता और सतर्कता बरती
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सूरत तो हम देखते हैं लेकिन सूरत से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है- सीरत यानी स्वभाव! अपने स्वभाव को देखने की कला है-विपश्यना। यह कला गौतम बुद्ध ने दुनिया को सिखाई है।
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यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि महाराष्ट्र में बहुत खतरनाक सियासी लड़ाई लड़ी जा रही है. इसमें बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें कहां तक अपने कदम बढ़ाने हैं.
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