भारत कम्पनियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को 'स्वदेशी' उत्पाद कहते हैं। आजादी से पहले स्वदेशी आन्दोलन की मूल प्रेरणा विदेशी शासन का विरोध करना था। क्या आजादी के बाद भी स्वदेशी का वही अर्थ रह गया है? क्या आजादी के बाद भी स्वदेशी को बढ़ावा देने का जिम्मा
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देश 75 वर्ष में इस स्थिति में पहुंचा है कि हम जिसके गुलाम थे आज हम उनको केवल आंख में आंख डालकर उनसे बात नहीं करते हैं अपितु दबाव में भी ले आ सकते हैं तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है तो इसको हमको गर्व से मनाना चाहिए।
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केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक रूप से चुने गए जनप्रतिनिधियों ने इन प्रतिकूल परिस्थितियों पर साहसपूर्वक विजय प्राप्त की। कई भारतीय दूसरे देशों में चले गए, सफलता के गुर सीखे और इनमें से कुछ भारत लौट आए। अगले बीस वर्षों तक, इन व्यक्तियों न
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हम वाकई खुशनसीब हैं. हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. लोकतंत्र में जी रहे हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में अब भी कम से कम 83 ऐसे देश हैं जहां के नागरिक गुलामों जैसी जिंदगी जी रहे हैं. कहीं सीधे-सीधे कोई तानाशाह सत्ता दबोच कर बैठा है तो
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पीएम नरेंद्र मोदी की जो लोकप्रियता साल 2014 में थी वैसी ही 2022 में महसूस होती है। पीएम मोदी की हर एक आवाज पर आज भी पहले की तरह ही देश खड़ा हो उठता है।
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आजकल हमारी प्रांतीय सरकारें लगभग 15 लाख करोड़ रु. के कर्ज में डूबी हुई हैं। वे रेवड़ियां बांटने में एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए उतावली हो रही हैं। कुछ सरकारों ने तो अपने नागरिकों को बिजली और पानी मुफ्त में देने की घोषणा कर रखी है।
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वर्ष 2018 में राष्ट्रपति बनने के बाद नई दिल्ली की अपनी हाल की तीसरी यात्रा के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद 'इबू' सोलिह का यह बयान द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत उनके देश और सरकार के लिए सर्वोच्
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आपको बता दें कि रेलवे की नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए 2019 में 1.3 लाख पदों के लिए ग्रुप-डी की अधिसूचना के बाद से इसकी परीक्षा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है।
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1910 में बड़ौदा राज्य के शासक संभाजीराव गायकवाड़ ने पुस्तकालय आंदोलन की नींव डाली थी। यहीं पहली बार पुस्तकालय के विकास के बारे में सोचा गया। आंध्रप्रदेश में पूंजीपतियों ने अपने व्यक्तिगत पुस्तकालय स्थापति किए।
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आमिर खान और करीना कपूर की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' हॉलीवुड फिल्म 'फॉरेस्ट गम्प' की हिन्दी रीमेक है। कुछ लोग आमिर खान के पुराने राजनीतिक बयान और कुछ फिल्मों के विषय को लेकर सोशलमीडिया पर उनकी फिल्म के बहिष्कार की मुहिम चला रहे हैं। यह फिल्म मैं भी नहीं
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