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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: महाराष्ट्र-हरियाणा में क्या होगा?

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: September 23, 2019 06:47 IST

महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस या यों कहें कि संपूर्ण विपक्ष की इतनी दुर्गति हो रही है, जितनी अन्य प्रांतों में कम ही हो रही है. प्रमुख विरोधी दलों के दिग्गज अपनी पार्टियां छोड़-छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. वे भाजपा के टिकट भी मांग रहे हैं. क्यों मांग रहे हैं?

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ठळक मुद्देविपक्षी दल कोई संयुक्त मोर्चा भी भाजपा के खिलाफ ठीक से खड़ा नहीं कर पा रहे हैं.यदि वे सब एकजुट हो जाएं तो भाजपा के लिए प्रचंड बहुमत पाना आसान नहीं होगा.

अब से एक महीने बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव होंगे. इन दोनों राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्नी पांच साल पहले बने थे. पिछले पांच वर्षो में इन राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्रियों क्रमश: देवेंद्र फडणवीस और मनोहर खट्टर ने अपनी छवि इतनी साफ-सुथरी बनाई है कि उनकी वापसी हो सकती है. लेकिन जीतने के और भी कारण हैं.  

पहला कारण है, केंद्र की भाजपा सरकार का पहले 100 दिनों में जबर्दस्त जलवा बनना. यह बना है, कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने से, बालाकोट के हमले से, तीन तलाक की समाप्ति से और मोदी की अंतर्राष्ट्रीय छवि के चमकने से! इस राष्ट्रीय सफलता का प्रभाव इन प्रांतीय चुनावों पर पड़े बिना नहीं रहेगा. 

दूसरा, महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस या यों कहें कि संपूर्ण विपक्ष की इतनी दुर्गति हो रही है, जितनी अन्य प्रांतों में कम ही हो रही है. प्रमुख विरोधी दलों के दिग्गज अपनी पार्टियां छोड़-छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. वे भाजपा के टिकट भी मांग रहे हैं. क्यों मांग रहे हैं? क्योंकि वे हवा के रुख को पहचान गए हैं. 

तीसरा, विपक्षी दल कोई संयुक्त मोर्चा भी भाजपा के खिलाफ ठीक से खड़ा नहीं कर पा रहे हैं. यदि वे सब एकजुट हो जाएं तो भाजपा के लिए प्रचंड बहुमत पाना आसान नहीं होगा. हरियाणा की 90 सीटों में से 2014 में भाजपा को 47, इनेलो को 19 और कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दसों सीटें जीत ली थीं. 

इस हिसाब से अब इस विधानसभा चुनाव में विपक्ष सिर्फ 20-25 सीटों तक सिमट जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. महाराष्ट्र में 2014 में भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. भाजपा को 122 और शिवसेना को 63 और कांग्रेस को सिर्फ 42 सीटें मिली थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 41 सीटें जीत ली थीं. तो सोचिए अब इन दोनों गठबंधनों- भाजपा+ शिवसेना और कांग्रेस+एनसीपी में टक्कर होगी तो क्या होगा?

इन दोनों राज्यों में होने वाले चुनाव भाजपा को मुगालते में भी डाल सकते हैं. असंभव नहीं कि इनमें मिलने वाली अपूर्व विजय भाजपा सरकार को अर्थव्यवस्था की गिरावट के प्रति लापरवाह बना दे.

टॅग्स :हरियाणामहाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019
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