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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: विपक्ष को एक किया सीएए ने

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: January 13, 2020 08:53 IST

यह कानून भाजपा के लिए कहीं भस्मासुरी सिद्ध न हो जाए. इस कानून का मूल उद्देश्य तो बहुत अच्छा है कि पड़ोसी मुस्लिम देशों के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाए लेकिन उसका आधार सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न हो, यह बात भारत के मिजाज से मेल नहीं खाती.

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लगभग वैसी ही भूल है, जैसी मोदी सरकार ने नोटबंदी की भयंकर भूल की थी. इन दोनों कामों के करने के पीछे भावना तो बहुत अच्छी रही लेकिन इनके दुष्परिणाम भयावह हुए हैं.

नोटबंदी से सारा कालाधन सफेद हो गया. सैकड़ों लोगों ने अपनी जान से हाथ धोया और 30 हजार करोड़ रुपए नए नोट छापने में बर्बाद हुए लेकिन नोटबंदी ने भाजपा सरकार का ज्यादा नुकसान नहीं किया. लोगों को पक्का विश्वास था कि वह देश के भले के लिए की गई थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानूनमोदी सरकार और भाजपा को मुश्किल में डाल चुका है. 

यह कानून भाजपा के लिए कहीं भस्मासुरी सिद्ध न हो जाए. इस कानून का मूल उद्देश्य तो बहुत अच्छा है कि पड़ोसी मुस्लिम देशों के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाए लेकिन उसका आधार सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न हो, यह बात भारत के मिजाज से मेल नहीं खाती. उत्पीड़न किसी भी तरह का हो, और वे उत्पीड़ित सिर्फ तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों के ही क्यों, किसी भी पड़ोसी देश के हों, भारत के द्वार उनके लिए खुले होने चाहिए. हर व्यक्ति के गुण-दोष परखकर ही उसे भारत का नागरिक बनाया जाए. न थोक में नागरिकता दी जाए और न ही थोक में मना की जाए. इस सिद्धांत का पालन ही सच्चा हिंदुत्व है. लेकिन इस संशोधित कानून ने इस सिद्धांत का सरासर उल्लंघन किया है इसीलिए समाज के सभी वर्गो के युवा इसका विरोध कर रहे हैं.

सारे देश के विरोधियों को इस कानून ने एक कर दिया है. बांग्लादेश जैसे भारत के अभिन्न मित्र देश ने पिछले कुछ सप्ताहों में अपने मंत्रियों की चार भारत-यात्नाएं स्थगित कर दीं. कई मित्न-राष्ट्रों ने इस कानून को अनुचित बताया है. प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी का इतना विरोध हुआ कि कोलकाता में उन्हें कार छोड़कर हेलिकॉप्टर से यात्ना करनी पड़ी है. अनेक गैरभाजपाई राज्य सरकारें इस कानून को लागू नहीं करने की घोषणा कर चुकी हैं. इस कानून की वजह से ‘नागरिकता रजिस्टर’ जैसा उत्तम काम भी खटाई में पड़ता नजर आ रहा है.

टॅग्स :नागरिकता संशोधन कानूनकैब प्रोटेस्टमोदी सरकारनरेंद्र मोदी
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