These shades of English do not just finish existence of Hindi | Blog: अंग्रेजी की ये शान कहीं हिंदी के अस्तित्व को ही ना खा जाए
Blog: अंग्रेजी की ये शान कहीं हिंदी के अस्तित्व को ही ना खा जाए

बीते कुछ दिनों से मेट्रो से जाने का मौका कम मिल पा रहा है लेकिन हां जब भी जाती हूं तो आस पास का नजारा देखकर ऐसा लगता है कि मैं किसी विदेश में खड़ी हूं। अरे ऐसा महसूस इसलिए नहीं होता है क्योंकि दिल्ली मेट्रो इतनी विदेशी लगती है, ये मुझे इसलिए लगता है क्योंकि आसपास के लोगों की अंग्रेजी मुझे विदेश में होने  की फीलिंग देती है।   हिंदी है हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा हमारा... ये शब्द तो अब गायब से लगने लगे हैं। मैट्रो की ही बात क्यों करूं आमतौर पर आज अगर किसी से भी बात की जाए तो आप भले हिंदी में बात करें लेकिन जवाब आपको अंग्रजी में ही प्राप्त होगा।

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 ऐसा लगता है कि जिस देश के नाम में ही हिंदी आता है वहां आज हिंदी ही कहीं विलुप्त होने की कगार पर खड़ी है। मार्क टुली ने एक बार एक बात कही थी मुझे दुख होता है जब कि मैं एक विदेशी होकर भी भारत में किसी से हिंदी में कोई सवाल करता हूं तो मुझे उसका जवाब अंग्रेजी में मिलता है। मेरे साथ तो सच में ऐसा ही होता है मैं भले हिंदी में पूछूं जनाब जवाब अंग्रेजी में ही प्राप्त होगा। ऐसे में सामने वाला आपको ऐसे देखता है जैसे आप किसी दूसरी दुनिया से आईं हैं और अंग्रेजों की इस इस खूबसूरत दुनिया के बारे में आप कुछ नहीं जानती हों।

अंग्रेजी बोलने का ये नजारा  हमें हर कदम पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, मुंबई, बंग्लौर जैसे बड़े शहरो में अंग्रेजी का बोलबाला इस कदर बड़ गया है कि आज हम अपनी ही राष्ट्र भाषा को खुद से दूर करते जा रहे हैं। हिंदी केवल हमारी भाषा ही नहीं बल्कि मां भी कभी कही जाती थी, जो शायद नहीं कही जाती है। हिंदी हमारी भाषा का वो धागा है जिसने हमें और आपको एक सूत्र में बांधे रखा है। 

आज नजारा ऐसा हो गया है कि  जब एक बच्चा बोलना सीखता है तभी से उसके ऊपर अंग्रेजी का भार डाल दिया जाता है। उसके हर शब्द अंग्रेजी के हों इसके लिए मां-बाप हर कोशिश करते हैं। हिंदी मीडिया वाले स्कूल की जगह अंग्रेजी मीडियम वाले मंहगे स्कूलों में भेजते हैं। जहां हिंदी महज एक विषय तक की ही सांसे भरती दिखती है। वो मेरी प्यारी हिंदी कहां जा रही कोई वहीं जानता। मुझे तो ऐसा भी लगता है कि अगर आप अंग्रेजी नहीं बोल पा रहे तो हीनदृष्टि के भी शिकार हो सकते हैं।

हां 14 सितंबर को एक दिन के लिए हर किसी को याद आ जाता है कि भाई हिंदी भी बोलना है, अरे क्योंकि उस दिन हिंदी दिवस होता है तो हर कोई सोशल मीडिया पर जमकर ज्ञान एक दिन के लिए बघार देता है। लेकिन अब मोबाइल ने मेरे जैसे कुछ हिंदी प्रेमियों के जीवन में खुशी भी दी है। अब मोबाइल पर हिंदी में समाचार खोजना जून 2016 में संभव हो गया है।आज हिंदी में आने लगे थे। इससे मोबाइल पर हिंदी का जबरदस्त विस्तार हुआ। आज आप अपने मोबाइल से हिंदी में टाइपिंग कर सकते हैं। 

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हिंदी जो हर हिन्दुस्तानी की जान है शान और अभिमान है। इसको भला बोलने से क्यों कराना और इसका सबसे बड़ा उदाहारण इस देश के पीएम ने दिया है जो सबसे विदेशों में तक अपनी राष्ट्रीय भाषा का प्रयोग करते हैं। हिंदी हमारी शान है, भारत देश का गौरव और हमारा मान सम्मान है। यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। बस ऐसा हो एक दिन ये हिंदी का अस्तित्व ही कहीं खो जाए।


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