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Temperature Crosses: एसी की मांग से बढ़ सकता है बिजली संकट?, मार्च में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार

By निशांत | Updated: March 28, 2025 05:14 IST

Temperature Crosses: नया अध्ययन बताता है कि अगर भारत सभी नए एसी को ज्यादा ऊर्जा-कुशल बना दे, तो 2.2 लाख करोड़ रुपए की बिजली बचाई जा सकती है और संभावित बिजली कटौती से बचा जा सकता है.

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ठळक मुद्देभारत में हर साल एक से डेढ़ करोड़ नए एसी बिकते हैं.अगले 10 वर्षों में यह संख्या 15 करोड़ तक पहुंच सकती है. भारत के कुल बिजली उत्पादन का 30% हो सकता है.

Temperature Crosses: भारत में इस साल गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ने की ठान ली है. मार्च में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, और आने वाले महीनों में हालात और बिगड़ सकते हैं. भीषण लू और उमस भरी गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर (एसी) की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़ती मांग बिजली संकट को और गहरा सकती है. एक नया अध्ययन बताता है कि अगर भारत सभी नए एसी को ज्यादा ऊर्जा-कुशल बना दे, तो 2.2 लाख करोड़ रुपए की बिजली बचाई जा सकती है और संभावित बिजली कटौती से बचा जा सकता है.

यूसी बर्कले के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (आईईसीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल एक से डेढ़ करोड़ नए एसी बिकते हैं, और अगले 10 वर्षों में यह संख्या 15 करोड़ तक पहुंच सकती है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो 2030 तक 120 गीगावाॅट और 2035 तक 180 गीगावाॅट तक अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी-जो भारत के कुल बिजली उत्पादन का 30% हो सकता है.

इससे बिजली की भारी कमी हो सकती है और 2026 तक ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर भारत एसी की ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफीशिएंसी) दोगुनी कर दे, तो यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है. 2027 तक 1-स्टार एसी की न्यूनतम ऊर्जा दक्षता को 5-स्टार के मौजूदा स्तर तक बढ़ाया जाए.

हर तीन साल में एसी मानकों को और कड़ा किया जाए ताकि कम ऊर्जा में बेहतर कूलिंग मिले. बेहतर नमी नियंत्रण (डीह्यूमिडिफिकेशन) तकनीक अपनाई जाए, जिससे भारत के उमस भरे इलाकों में एसी कम बिजली खर्च करके भी ठंडक दे सकें. तो अगला कदम क्या होना चाहिए? सरकार को एसी की न्यूनतम ऊर्जा दक्षता  बढ़ानी होगी और ज्यादा कुशल एसी को अनिवार्य करना होगा.

ग्राहकों को जागरूक करना होगा, ताकि वे कम बिजली खपत वाले एसी खरीदें. एसी निर्माताओं को अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना होगा, ताकि भारतीय जलवायु के लिए बेहतर तकनीक विकसित की जा सके. गर्मी हर साल बढ़ रही है, और एसी जरूरी होते जा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि हम ऊर्जा-कुशल एसी को अपनाकर भारत को बिजली संकट से बचाएंगे या बढ़ती बिजली खपत के साथ ब्लैकआउट की ओर बढ़ेंगे?

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