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post office: 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस?, संचार क्रांति के दौर में भी डटे हुए हैं...

By अरविंद कुमार | Updated: October 9, 2024 05:46 IST

post office: विश्व में इस समय डाकघरों की संख्या करीब 6.40 लाख है. पर ज्यादातर देशों में डाकघर बंद होने के कारण कम होते जा रहे हैं.

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ठळक मुद्देभारत में विश्व में सबसे अधिक 1,64,972 डाकघर हैं.1,49,478 डाकघर ग्रामीण अंचलों में हैं.देश में प्रति डाकघर औसतन 7753 व्यक्तियों को सेवा दे रहा है.

post office: संचार क्रांति के कालखंड में पैदा हुई नई पीढ़ी ऐसे स्मार्ट फोनों से लैस है, जो उनके हर काम आती है. पढ़ाई-लिखाई से लेकर ऑनलाइन शाॅपिंग तक सारा काम वे इससे करते हैं. करीब 120 करोड़ मोबाइल फोनों वाले भारत में 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता हैं. ऐसे में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनको डाकघरों की अहमियत का कोई अंदाजा नहीं. पर यही देश की वास्तविकता नहीं है. बेशक संचार क्रांति के चलते पूरी दुनिया में डाक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है, पर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपादेयता के कारण भारत में डाकघरों का महत्व कायम है.

संचार क्रांति के इस दौर में भी भारत में विश्व में सबसे अधिक 1,64,972 डाकघर हैं. इनमें 1,49,478 डाकघर ग्रामीण अंचलों में हैं. देश में प्रति डाकघर औसतन 7753 व्यक्तियों को सेवा दे रहा है. आजादी के बाद हमारा डाक तंत्र सात गुना बढ़ा है. विश्व में इस समय डाकघरों की संख्या करीब 6.40 लाख है. पर ज्यादातर देशों में डाकघर बंद होने के कारण कम होते जा रहे हैं.

लेकिन भारत में पिछले पांच वर्षों में सरकार ने 5,639 नए डाकघर खोले हैं. 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस मनाने की पंरपरा जारी है. इस बाबत 1969 में टोकियो में आयोजित विश्व डाक संघ (यूपीयू) के सम्मेलन में फैसला हुआ था. इसकी मातृ संस्था जनरल पोस्टल यूनियन संयुक्त राष्ट्र संघ के बनने के पहले 9 अक्तूबर, 1874 को स्थापित हुई थी, जिसका नाम 1879 में विश्व डाक संघ रखा गया.

भारत 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बनने वाला पहला एशियाई देश था. इस संगठन से दुनिया के 192 राष्ट्रीय डाक नेटवर्क जुड़े हैं. विश्व डाक दिवस के मौके पर भारतीय डाक 9 से 14 अक्तूबर के बीच डाक सप्ताह मनाता है. 10 अक्तूबर को बचत बैंक दिवस, 11 अक्तूबर को मेल दिवस, 12 अक्तूबर को डाक टिकट संग्रह दिवस, 13 अक्तूबर को व्यापार दिवस तथा 14 अक्तूबर को बीमा दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसी मौके पर विशिष्ट सेवाओं के लिए पोस्टमैनों को सम्मानित भी किया जाता है.

दरअसल आधुनिक रूप में 1 अक्तूबर, 1854 को स्थापित भारतीय डाक सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ी रही और एक दौर में संचार क्षेत्र की धड़कन बनी. डाक, बैंकिंग, जीवन बीमा और मनी आर्डर या रिटेल सेवाओं के माध्यम से इसका लोगों के साथ जुड़ाव कायम रहा. बहुत कुछ बच गया है पर चिट्ठियों को नहीं बचाया जा सका है. एक दौर में दुनिया की डाक व्यवस्था का सबसे बड़ा काम चिट्ठियां ही थीं.

जिन घरों में सबसे ज्यादा चिट्ठियां आती थीं, उनकी अलग हैसियत थी. जाने कितना साहित्य पोस्टमैन और चिट्ठियों पर उपलब्ध है. आधुनिकतम संचार क्रांति के पास चिट्ठियों जैसी शक्ति नहीं है इसलिए विश्वभर में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो मानते हैं कि पत्रों की धरोहर को बचाना जरूरी है. दुनिया का तमाम साहित्य और इतिहास पत्रों पर केंद्रित है और मानव सभ्यता के विकास में इन पत्रों ने भूमिका निभाई है.

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