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जगत प्रकाश नड्डा का ब्लॉग: कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में दुनिया को राह दिखा रहा भारत

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 13, 2020 11:15 IST

सरकार ने प्रधानमंत्नी गरीब कल्याण निधि के तहत जरूरतमंदों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. अब तक 39 करोड़ लोगों को 34,800 करोड़ रुपए की सीधी सहायता पहुंचाई जा चुकी है.

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कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश का नेतृत्व नरेंद्र मोदी जैसे सशक्त व्यक्ति के हाथों में है. उन्होंने न केवल समय पर देश भर में पूर्ण लॉकडाउन लागू किया बल्किसोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना वॉरियर्स के सम्मान को जन-मानस का मंत्न भी बना दिया.

प्रधानमंत्नी की दूरदर्शिता, सख्त फैसले और राहत के चौतरफा उपायों की वजह से ही करीब 130 करोड़ की आबादी वाले भारत में कोरोना वायरस अपने पैर नहीं पसार पा रहा है. पूरी दुनिया ने कोरोना से जंग के मामले में भारत की प्रशंसा की है और इस बात को स्वीकार किया है कि वह इस जंग में मिसाल बन कर उभरा है.

कोरोना संकट पर प्रधानमंत्नी द्वारा लिए गए त्वरित निर्णय यह बताने के लिए काफी हैं कि अब हिंदुस्तान समस्याओं को टालने में नहीं, बल्कि चुनौतियों का मुकाबला करने में यकीन रखता है. शुरुआती अप्रैल में जहां हम पीपीई किट और एन-95 मास्क के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे, वहीं आज प्रत्येक दिन लगभग ढाई लाख पीपीई किट और दो लाख से अधिक एन-95 मास्क का उत्पादन हो रहा है. बहुत जल्द भारत इन चीजों के उत्पादन में चीन से आगे निकल जाएगा. शुरुआत में जहां विशेषज्ञ वेंटीलेटर्स की कमी को लेकर चिंता जता रहे थे, वहीं आज वेंटीलेटर्स की कोई कमी नहीं है.

अप्रैल तक देश में लगभग 5 लाख से अधिक आइसोलेशन बेड तैयार कर लिए गए थे जबकि अब पर्याप्त मात्ना में आईसीयू बेड भी तैयार हैं ताकि किसी भी चुनौती से आसानी से निबटा जा सके. रेलवे के कई कोचों को आइसोलेशन बेड में बदला जा चुका है. फिलहाल 215 स्टेशनों पर रेलवे कोच को कोरोना केयर्स के लिए खड़ा किया जा चुका है. ये इंतजामात बताते हैं कि भारत ने इतने कम समय में ही किस तरह स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को जरूरत के हिसाब से अपग्रेड कर लिया है.

मार्च के अंत में जहां कम टेस्टिंग को लेकर कई चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं, वहीं पिछले दो दिनों में 1.60 लाख से अधिक टेस्ट हुए और टेस्ट का आंकड़ा 15 लाख को पार कर गया. साथ ही, भारत ने मृत्यु दर को भी स्थिर रखने में सफलता हासिल की है. मृत्यु दर के मामले में भी भारत दक्षिण कोरिया, चीन, रूस और अमेरिका इन सबसे पीछे है. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कोरोना से मौत की दर इन सबसे कम है. पूर्वोत्तर में 8 से 6 राज्य संक्र मणमुक्त हो चुके हैं. गोवा पूरी तरह कोविड-फ्री है. कोरोना प्रभावित जिलों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है जबकि लगभग 300 जिले ग्रीन जोन में हैं. रिकवरी रेट लगातार इम्प्रूव कर रहा है.

अब यह लगभग 31 प्रतिशत को पार कर गया है जो बताता है कि कोरोना से लड़ाई में हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि यदि समय पर लॉकडाउन लागू न किया गया होता तो देश में कोरोना के आंकड़े कहीं अधिक भयावह हो सकते थे. भारत में अमेरिका, इटली और स्पेन समेत कई देशों के मुकाबले हालात बेहतर हैं. यहां नए मामले तो सामने आ रहे हैं लेकिन केस दोगुने होने की दर अभी भी काबू में है. विशेषज्ञ लॉकडाउन का सख्ती से पालन होने को इसकी बड़ी वजह मान रहे हैं.

कोरोना जैसे खतरनाक वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने और प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों से परामर्श करने के अलावा विशेषज्ञों की 11 कोर टीमों के साथ रोजाना 17 से 18 घंटे काम कर रहे हैं. ये टीमें 24 घंटे मिशन मोड में काम कर रही हैं. पीएम केयर्स फंड कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में एक बड़ा हथियार बन कर उभरा है.

सरकार ने प्रधानमंत्नी गरीब कल्याण निधि के तहत जरूरतमंदों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. अब तक 39 करोड़ लोगों को 34,800 करोड़ रुपए की सीधी सहायता पहुंचाई जा चुकी है. मोदी सरकार ने किसानों और महिलाओं के एकाउंट में सीधे सहायता राशि हस्तांतरित की, उद्योगों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया, गरीबों के लिए मुफ्त राशन और गैस की व्यवस्था की और अब प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए युद्ध-स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं.

संकट की इस घड़ी में भी जिस तरह भारत ने बड़े-बड़े देशों को दवाओं की आपूर्ति की है, सहयोगी देशों में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भेजी है, वह अभूतपूर्व है. भारत कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक लीडर के तौर पर सामने आया है. 

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