लाइव न्यूज़ :

ब्लॉग: चुनाव प्रचार में बच्चों का उपयोग नहीं करने का निर्देश सराहनीय

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 7, 2024 11:24 IST

ऐसा नहीं है कि चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल को रोकने की इसके पहले कोशिश नहीं हुई है। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले साल मार्च में चुनाव अभियानों और अन्य चुनाव संबंधित कार्यों के लिए बच्चों का उपयोग करने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे।

Open in App

चुनाव प्रचार अभियान में राजनीतिक दलों द्वारा बच्चों का इस्तेमाल नहीं करने का चुनाव आयोग का निर्देश निश्चित रूप से एक स्वागतयोग्य कदम है। आयोग ने कहा है कि अगर कोई उम्मीदवार दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। दरअसल इस बारे में नियम तो पहले से ही बने हुए थे, लेकिन उनकी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

आम चुनाव में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के प्रचार के पर्चे बांटते, पोस्टर चिपकाते, नारे लगाते या पार्टी के झंडे-बैनर लेकर चलते हुए बच्चों को आसानी से देखा जा सकता था लेकिन अब चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

असल में चुनावों को साफ-सुथरा और गरिमापूर्ण बनाने के लिए नियम-कानूनों की कमी नहीं है। चुनाव आयोग अगर चाहे तो मौजूदा नियमों के अंतर्गत ही ऐसा कर सकता है। देश के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का कार्यकाल आज भी लोग भूले नहीं हैं, जिन्होंने नब्बे के दशक में दिखा दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त वास्तव में कैसा होना चाहिए तथा चुनाव आयोग और उसके चुनाव आयुक्त चाह लें तो चुनावों के दौरान न केवल निष्पक्षता बरकरार रह सकती है बल्कि भयमुक्त चुनाव भी हो सकते हैं।

बहरहाल, बात जहां तक चुनाव प्रचार अभियान में राजनीतिक दलों या उसके उम्मीदवारों द्वारा बच्चों का इस्तेमाल करने की है तो ऐसा न केवल बच्चों को सस्ता श्रम मानकर किया जाता है बल्कि बच्चों के जरिये भावनात्मक तौर पर भी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की जाती है। कोई कुख्यात अपराधी भी अगर अपने चुनाव प्रचार में बच्चों का सहारा ले तो लोगों को उसके अपराध की गंभीरता कम लगने लगती है।

यह एक तरह से बच्चों के प्रति आम लोगों की भावनाओं और संवेदनाओं का दोहन है। ऐसा नहीं है कि चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल को रोकने की इसके पहले कोशिश नहीं हुई है। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले साल मार्च में चुनाव अभियानों और अन्य चुनाव संबंधित कार्यों के लिए बच्चों का उपयोग करने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। अब लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाने से उम्मीद की जानी चाहिए कि चुनावों में बच्चों के शारीरिक और भावनात्मक दोहन पर रोक लग सकेगी, उन्हें मोहरा नहीं बनाया जाएगा और वे खुलकर अपने बचपन को जी सकेंगे।

टॅग्स :चुनाव आयोगभारत
Open in App

संबंधित खबरें

भारतक्या पीएम मोदी ने किया आचार संहिता का उल्लंघन? प्रधानमंत्री के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' पर 700 कार्यकर्ताओं ने की चुनाव आयोग से शिकायत

विश्वअब डील पक्की! भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट की फाइनल तैयारी शुरू, खुलेंगे निवेश के नए रास्ते

भारतफ्री में पढ़ें विदेश के टॉप विश्वविद्यालयों में! भारत सरकार दे रही है 125 छात्रों को स्कॉलरशिप, जानें कैसे करें अप्लाई

भारतWest Bengal Polls 2026: मुर्शिदाबाद में वोटर लिस्ट से पूरे परिवार का नाम गायब, मतदाता सूची से कटा नाम; जानें सिस्टम की चूक या साजिश?

विश्व'आपने मंज़ूरी दी थी, अब आप ही गोलीबारी कर रहे हैं': ईरानी हमले के बाद भारतीय जहाज़ से वायरल हुआ आपातकालीन संदेश, WATCH

भारत अधिक खबरें

भारतPahalgam Attack Anniversary: पहलगाम नरसंहार की बरसी पर उमर अब्‍दुल्‍ला और मनोज सिंन्‍हा, बोले- "हम न भूलेंगे और न माफ करेंगे"

भारतपहलगाम हमले के एक साल: पीएम मोदी ने दी पीड़ितों को श्रद्धांजलि, कहा- "भारत न झुकेगा, न डरेगा"

भारतPahalgam Attack Anniversary: पहलगाम नरसंहार के बाद आपरेशन सिंदूर के जख्‍म अभी भी हरे एलओसी से सटे गांवों में

भारतताकि आग लगने पर कुआं खोदने की न आए नौबत 

भारतपिघलती बर्फ, तपती धरती से बढ़ता खतरा