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Delhi Election Results 2025 Updates: आखिर दिल्ली ने कहा, आप तो ऐसे न थे?, कहां से कहां आ गए...

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 10, 2025 05:48 IST

Delhi Election Results 2025 Updates: दिल्ली के गठन के बाद से वहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता संभालने का मौका केवल एक बार मिला. उसके बाद तीन बार कांग्रेस और तीन ही बार ‘आप’ ने सरकार चलाई.

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ठळक मुद्देपार्टी का पूरा दारोमदार हो, वही चुनाव हार जाए, तो असंतोष कहीं विद्यमान है. पतन इतना बुरा हुआ कि उस पर गंभीर विचार-मंथन आवश्यक हो चला है.वर्ष 2020 में 62 जीतने के बाद सीधे 22 सीटों पर आना कई सवाल खड़े करता है.

Delhi Election Results 2025 Updates: आम आदमी की पार्टी को आम आदमी ही कुर्सी से नीचे उतार दे, यह कैसे हो सकता है? एक जनआंदोलन के माध्यम से बनी राजनीतिक पार्टी मात्र 12 साल से अधिक समय में विधायकों की संख्या में आधे से नीचे आ जाए, तो सवाल उठता ही है. जिस व्यक्ति के नाम पर पार्टी का पूरा दारोमदार हो, वही चुनाव हार जाए, तो असंतोष कहीं विद्यमान है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के गठन के बाद से वहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता संभालने का मौका केवल एक बार मिला. उसके बाद तीन बार कांग्रेस और तीन ही बार ‘आप’ ने सरकार चलाई.

मगर दोनों का ही पतन इतना बुरा हुआ कि उस पर गंभीर विचार-मंथन आवश्यक हो चला है. कांग्रेस ने दिल्ली की रूपरेखा बदली. आप ने सुशासन से आम आदमी की परेशानियों को कम करने का प्रयास किया, जिसके नतीजे में वर्ष 2013 में 28 सीटें जीतने वाली ‘आप’ 67 तक पहुंच गई. मगर वर्ष 2020 में 62 जीतने के बाद सीधे 22 सीटों पर आना कई सवाल खड़े करता है.

ठीक उसी प्रकार, जिस प्रकार कांग्रेस दिल्ली में अपना खाता ही नहीं खोल पाई. दरअसल, दिल्ली में विपक्षी भाजपा ने पहले शराब के ठेकों के विवाद को उठाया. फिर आम आदमी से जुड़ी समस्याएं पानी, सड़क और प्रदूषण को चर्चा में लाया. शराब के ठेकों में भ्रष्टाचार और मुख्यमंत्री निवास के निर्माण की अनियमितताएं ‘आप’ को कठघरे में खड़े करने के लिए काफी थीं.

मगर उसे लग रहा था कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर अपना दामन बचा लेगी, लेकिन जिस पार्टी का जन्म ही भ्रष्टाचार के विरोध में हुआ हो, उसके समर्थक दागों को कैसे अनदेखा कर देंगे? यही कुछ कारण है कि वर्ष 2013 में ‘आप’ को समर्थन देने वाली कांग्रेस वर्ष 2025 में उसे न केवल चुनौती ही दे रही थी, बल्कि उस पर सवाल भी खड़े कर रही थी.

कुछ यही बात आम आदमी के मन में पैदा हुई, जिसने सारे समीकरण बदल दिए. दिल्ली में सड़कों की हालत, बरसात में पानी भरना और आम दिनों में यातायात की समस्या सिर चढ़कर बोल रही थी. मगर दिल्ली सरकार कुछ स्कूलों के नवीनीकरण और मोहल्ला क्लीनिक जैसी योजनाओं को अपनी उपलब्धि मान बैठी थी.

हालांकि दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य कभी-भी मुश्किल नहीं रहा. उसके नाम पर कितनी भी राजनीति की जाए, मगर उसका सीधा प्रभाव आम आदमी पर नहीं था. इसके अलावा हर समस्या के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के साथ संघर्ष की स्थितियां बनना अच्छा नहीं था.

इसीलिए करीब तीन अवसरों के बाद जब ‘आप’ के गठन के पीछे की सोच और वर्तमान परिदृश्य पर विचार हुआ तो यही लोगों को कहना पड़ा कि आप तो ऐसे न थे. अब आवश्यक यही है कि ‘आप’ अपनी गलतियों पर विचार करे और नई सरकार बनाने वाली भाजपा आम आदमी की आकांक्षाओं की सरकार बनाए. चुनावी प्रलोभन और एक-दूसरे पर लांछन लगाकर एक चुनाव जीता जा सकता है, किंतु बार-बार चुनाव नहीं जीता जा सकता.

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