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ब्लॉग: प्रत्येक नागरिक को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: October 13, 2023 13:55 IST

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया: अर्थात सभी सुखी रहें, सभी रोगमुक्त रहें, प्राचीन काल से ही यह श्लोक स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र का मूल बना हुआ है. स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों का न होना ही नहीं है, बल्कि यह भोजन, सुरक्षा, शुद्ध जलापूर्ति, आवास, साफ-सफाई और जीवनशैली आदि से भी प्रभावित होता है.

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ठळक मुद्देस्वास्थ्य क्षेत्र की ओर विशेष ध्यान दिए जाने से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार दृष्टिगोचर हुआ है. कोरोना महामारी के दौरान जिस तरीके से भारत में इस महामारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया, इससे पूरे विश्व में भारत की सराहना भी हुई है.भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार के चलते ही देश के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा में बढ़ोत्तरी हुई है.

पिछले दो वर्षों में देश के स्वास्थ्य बजट में चार से पांच गुना बढ़ोत्तरी की गई है, साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में पिछले दस वर्षों में दोगुनी बढ़त्तरी हुई है. स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के पक्षधर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ. भागवत कराड ने यह बात लोकमत टाइम्स एक्सिलेंस इन हेल्थकेयर अवार्ड्स आयोजन के मुख्य अतिथि के तौर पर कही. 

इस मौके पर लोकमत मीडिया ग्रुप के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन व पूर्व सांसद विजय दर्डा ने कहा कि लोगों को जब तक सस्ती और बेहतर सेवाएं नहीं मिलेंगी तब तक देश विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता. इसमें कोई दो मत नहीं. दरअसल, किसी भी देश में स्वस्थ नागरिक उस देश के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी माने जाते हैं. 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया: अर्थात सभी सुखी रहें, सभी रोगमुक्त रहें, प्राचीन काल से ही यह श्लोक स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र का मूल बना हुआ है. स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों का न होना ही नहीं है, बल्कि यह भोजन, सुरक्षा, शुद्ध जलापूर्ति, आवास, साफ-सफाई और जीवनशैली आदि से भी प्रभावित होता है. नागरिकों के स्वस्थ रहने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधे-सीधे दो लाभ होते हैं. 

एक, देश के स्वस्थ नागरिकों की उत्पादकता तुलनात्मक रूप से अधिक रहती है. दूसरे, यदि नागरिक बीमार हैं तो उनको स्वस्थ रखने के लिए अधिक खर्च करना होता है, जो कि एक तरह से अनुत्पादक खर्च की श्रेणी में गिना जाता है, और बीमार नागरिकों की उत्पादकता तो कम होती ही है. 

यदि देश में उत्तम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं तो अस्वस्थ नागरिकों को जल्दी स्वस्थ कर पुनः उनकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है, जिसका सीधा लाभ उस नागरिक के साथ ही देश के आर्थिक विकास में सुधार के रूप में भी देखने में आता है. 

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि देश के नागरिक न केवल स्वस्थ रहें बल्कि यदि बीमार भी हों तो उन्हें उत्तम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें. स्वास्थ्य क्षेत्र की ओर विशेष ध्यान दिए जाने से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार दृष्टिगोचर हुआ है. 

कोरोना महामारी के दौरान जिस तरीके से भारत में इस महामारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया, इससे पूरे विश्व में भारत की सराहना भी हुई है. भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार के चलते ही देश के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा में बढ़ोत्तरी हुई है. फिर भी देश के अनेक इलाके ऐसे हैं जहां सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ नहीं हैं. 

सभी के लिए आसानी से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने के लिए आवश्यक है कि हर क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हों और स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए या स्वास्थ्य सेवाओं की घर तक उपलब्ध होने के लिए सरल संपर्क व्यवस्था हो. 

आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में जो भी सुविधाएं हैं, उन सुविधाओं से युक्त अस्पताल हर क्षेत्र में होना चाहिए. आबादी के अनुपात के हिसाब से अस्पतालों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए. सभी के लिए आसानी से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने लिए सरकार को अभी भी बेहद गंभीर स्तर पर बड़े प्रयास करने की जरूरत है.

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