लाइव न्यूज़ :

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों के काटे गए नाम, कहीं भ्रष्टाचार का खेल तो नही चल रहा था!

By एस पी सिन्हा | Updated: September 16, 2023 17:32 IST

केके पाठक ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर विशेष फोकस किया है। शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति पर भी केके पाठक का जोर दिखा है। वहीं उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि स्कूल नहीं आने वाले छात्र-छात्राओं के नाम काट दिए जाएं।

Open in App
ठळक मुद्देअब तक करीब एक लाख से अधिक बच्चों के नाम स्कूल से काटे जा चुके हैंशिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का पदभार संभालने के बाद से केके पाठक सख्तकेके पाठक ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर विशेष फोकस किया है

पटना:  बिहार के स्कूलों में नामांकन के आड़ में कहीं भारी भ्रष्टाचार का खेल तो नही चल रहा था? इस बात की चर्चा अब धीरे-धीरे जोर इस कारण पकडती जा रही है क्योंकि केके पाठक के द्वारा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का पदभार संभालने के बाद से अब तक करीब एक लाख से अधिक बच्चों के नाम स्कूल से काटे जा चुके हैं। 

दरअसल, केके पाठक ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर विशेष फोकस किया है। शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति पर भी केके पाठक का जोर दिखा है। वहीं उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि स्कूल नहीं आने वाले छात्र-छात्राओं के नाम काट दिए जाएं। इसका असर भी अब दिखने लगा है। राज्य में एक लाख से अधिक बच्चों के नाम स्कूलों से काटे जाने को नामांकन डुप्लिकेसी (एक से अधिक जगहों पर) खत्म करने तथा योजनाओं का गलत लाभ लेने को लेकर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

ये सभी ऐसे विद्यार्थी हैं, जो एक ही साथ सरकारी और निजी विद्यालयों में दाखिला लिए हुए हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर ये बच्चे स्कूल नही आ रहे थे तो इनके नाम पर कही सरकारी योजनाओं के लाभ के नाम पर लूट तो नहीं हो रही थी? शिक्षा विभाग को जिलों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक 13 सितंबर तक 1 लाख 1 हजार 86 बच्चों के नाम कटे हैं। हालांकि, इस आंकड़े में 4 जिलों की रिपोर्ट शामिल नहीं है, लिहाजा ये आंकड़ा और बढ़ सकता है। जिलों की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम चंपारण और अररिया जिले में सबसे अधिक करीब 10-10 हजार बच्चों के नाम काटे गए है।

वहीं, पटना में 7 हजार बच्चों का नाम कटा है, जिनमें 4 हजार ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय के हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली पोषाहार योजना, ड्रेस योजना सहित कई योजनाओं का कहीं बंदरबांट का खेल तो नही चल रहा था? अगर ये बच्चे स्कूल नही आ रहे थे तो फिर इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे दिया जा रहा था। चर्चाओं पर गौर करें तो अगर किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो बिहार में एक बडा शिक्षा घोटाला सामने आ सकता है।

टॅग्स :School Educationनीतीश कुमारNitish KumarEducation Department
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टबिहार के मोतिहारी जिले में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या हुई 10, कई लोगों की स्थिति अभी भी गंभीर

भारतबिहार में CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर महिलाओं ने शुरू किया सत्याग्रह

क्राइम अलर्टबिहार की राजधानी पटना से सटे खगौल में अपराधियों ने खुद को कस्टम अधिकारी बताकर स्वर्ण व्यापारियों से लूटा 16 किग्रा सोना

भारतWATCH: बिहार के सारण जिले में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष का एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो वायरल, दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे खेत में एक लड़की नेता के पीछे भाग रही है

भारतबिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर सियासी हलचल हुई तेज, 12 अप्रैल को नीतीश कुमार दे सकते हैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, भाजपा में मुख्यमंत्री को लेकर जारी है मंथन 

बिहार अधिक खबरें

बिहारबिहार के जेलों में रहने वाले कैदी अब कर रहे हैं यूपीएससी/ बीपीएससी और सरकारी नौकरियों की तैयारी, पढ़ने और उच्च शिक्षा लेने की संख्या में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि

बिहारBihar: रोहिणी आचार्य ने कसा तंज, सोशल मीडिया पर लिखा- "विरासत को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती"

बिहारबिहार: गृहमंत्री सम्राट चौधरी के चेतावनी के बावजूद अपराधियों का हौसला नहीं हो रहा है पस्त, अब डालने लगे हैं मंदिर में भी डाका

बिहारBihar Assembly elections 2025: पहले चरण के रिकॉर्ड तोड़ मतदान से गदगद दिखे राजनाथ सिंह, कहा- 'दो तिहाई बहुमत एनडीए को हासिल हो सकती है'

बिहारBihar Assembly Elections 2025: उपेंद्र कुशवाहा का दावा, कहा- "NDA जीत सकती है बिहार चुनाव लेकिन..."