वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
एक संन्यासी को ऐसे प्रस्ताव पर बुरा लगना स्वाभाविक है लेकिन वह एक पार्टी का नेता, जनता का प्रतिनिधि और मुख्यमंत्री भी है. गुस्से में आकर एक पत्रकार को गिरफ्तार करना तो अपनी छवि को विकृत करना है. ...
पहले मालदीव जाकर प्रधानमंत्नी ने यह संदेश दिया कि इस बार उन्होंने अपनी शपथ-विधि में दक्षेस (सार्क) की बजाय ‘बिम्सटेक’ के देशों को बुलाया तो इसका अर्थ यह नहीं कि भारत दक्षेस देशों की उपेक्षा कर रहा है. ...
मायावती की सीटें तो शून्य से 10 हो गईं लेकिन अखिलेश जहां के तहां रह गए. 50-60 सीटें सपना बनकर रह गईं. अखिलेश में असीम संभावनाएं हैं लेकिन अपने पिता और चाचा के अपमान का फल उ.प्र. के यादवों ने उन्हें चखा दिया. इस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश से बढ़िया क ...
पहले जनसंघ और फिर भाजपा पर हिंदी थोपने का आरोप तो लगता ही रहा है. अब से लगभग 30 साल पहले जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्नी मुलायम सिंह और मैं, मद्रास में तत्कालीन मुख्यमंत्नी करुणानिधि से मिलने गए तो उनका पहला सवाल यही था कि क्या आप हम पर हिंदी थोपने यहा ...
चुनाव के दौरान सरकारी नेताओं ने काफी लंबी-चौड़ी बातें कहीं लेकिन आर्थिक मोर्चे पर वे मौन साधे रहे. उनका जोर देश के आर्थिक विकास पर उतना नहीं रहा, जितना राहत देने की राजनीति पर या बालाकोट आदि पर रहा. ...
इस नए मंत्रिमंडल के शपथ-समारोह में यह भी अच्छा लगा कि राजनाथ सिंह, अमित शाह और नितिन गडकरी की वरिष्ठता को यथोचित रखा गया. अमित शाह को गृह मंत्नी बना मोदी ने अनौपचारिक उप-प्रधानमंत्नी का पद कायम कर दिया है. ...