25 साल से पत्रकारिता में सक्रिय। नियमित स्तंभकार। बाजारवाद के दौर में मीडिया पुस्तक प्रकाशित। मशहूर पत्रिका दिनमान का मोनोग्राफ लेखन। लिखना यानी जिंदगी, पढ़ना यानी डिप्रेशन लेकिन दोनों से अथाह प्यार।Read More
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बार कहा था, “सभी को समय से न्याय मिले, न्याय व्यवस्था कम खर्चीली हो, समान्य आदमी की समझ में आने वाली भाषा में निर्णय लेने की व्यवस्था हो और खासकर महिलाओं और कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय मिले, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।” ...
इन दिनों तीन क्षेत्रीय दल ऐसे हैं, जिनकी महत्वाकांक्षा छुपाए नहीं छुप रही है. अपने क्षेत्र या राज्य की सीमाओं के बाहर सफल राजनीतिक कुलांचे भरने के लिए वे लगातार कोशिश कर रहे हैं. ...
दुनिया को गिरफ्त में ले चुके कोरोना को लेकर भारत में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर इसने देहाती इलाकों में पैर पसार लिए तो फिर भयावह नतीजों के लिए देश को तैयार रहना होगा. भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का जो हाल है, उसे लेकर ऐसी चिंता होना स्वाभाविक ही है. ...
सामान्य दिनों में अब तक ये फसलें या तो घरों में आ चुकी होतीं या फिर खलिहानों तक पहुंच गई होतीं. लेकिन व्यापक महाबंदी के चलते तैयार फसलें घरों को तो छोड़िए, खलिहान तक पहुंचने की बाट जोह रही हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर और आजमगढ़ से खड़ी ...
संयुक्त राष्ट्र द्वारा कुछ साल पहले कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक शहरों में चूंकि लगातार बिजली मिलती है, शिक्षा और रोजगार के साधन हासिल होते हैं इसलिए गरीब लोग भी शहरों की ओर लगातार पलायन कर रहे हैं और यह शहरी प्रदूषण के साथ वातावरण में ग्रीन हाउस गैस ...
सर्वोच्च न्यायलय के आदेश पर देश के पूर्वी राज्य असम में भारतीय और विदेशी मूल के नागरिकों की पहचान का जो काम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के जरिए किया गया है, अभी उस पर ही विवाद है. अब देश के कई राज्यों में इसे लागू करने की मांग होने लगी है. ...
अगर नरेंद्र मोदी की सरकार दोबारा वापस आती है तो उसके सामने चुनाव बाद महंगाई बढ़ने की अवधारणा को तोड़ना बड़ा मसला होगा. इसी तरह पेट्रोल की कीमतों में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी भी बता रही है कि चुनाव बाद महंगाई बढ़ने की अवधारणा पर काबू पाना आसान ...