सुरेश पिछले 30 सालों से जम्मू कश्मीर से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। देश के कई प्रतिष्ठित दैनिकों के लिए काम करते रहे हैं। जम्मू कश्मीर से संवाददाता पद पर कार्यरत हैं। वे वास्तु, अंकशास्त्र व ज्योतिष के भी जानकार हैं।Read More
पिछले 32 सालों के आतंकवाद के दौर के दौरान सरकारी तौर पर आतंकियों ने 1000 के करीब राजनीति से सीधे जुड़े हुए नेताओें को मौत के घाट उतारा है। इनमें ब्लाक स्तर से लेकर मंत्री और विधायक स्तर तक के नेता शामिल रहे हैं। ...
बीते साल चार मई को अनंतनाग के नौगाम वेरीनाग में आतंकियों ने भाजपा के बुजुर्ग नेता गुल मोहम्मद मीर अटल की उनके घर के बाहर हत्या कर दी थी। बीते जून महीने की शुरुआत में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने कश्मीरी पंडित सरपंच अजय पंडिता की गोली मारक ...
एलएसी के दोनों ओर 45000 जवानों के पीछे हटने पर भी चर्चा होगी, सूत्रों का कहना था। इससे पहले दो दफा चीन के मोलदो और एक बार भारत के चुशुल में बातचीत हो चुकी है। ...
लापरवाही के आरोप में सुरक्षा में तैनात दस पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच चल रही है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद यह वारदात पूर्व सुनियोजित हमले की तरह लग रही है। इस बात की पुष्टि आईजी कश्मीर जोन विजय कुमार ने भी की है। ...
पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें 8 सुरक्षाकर्मी मुहैया करवाए गए थे, लेकिन हमले के समय वे उनके पास नहीं थे। इसकी जांच की जा रही है। वहीं पुलिस ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया है और हमलावरों की तलाश कर रही ...
सियाचिन हिमखंड पर प्रतिदिन सेना व वायुसेना 10 करोड़ की राशि खर्चा करती है। और अब ठीक इसी प्रकार का नया आर्थिक बोझ लद्दाख के मोर्चे पर उठाना पडे़गा, क्योंकि चीन के बढ़ते कदमों को रोकना लाजिमी है। ...
चीनी सेना की चाल थी जिसके तहत उसने पीपी-14 प्वाइंट और गलवान वैली के झड़प वाले इलाकों को मिला कर करीब 3 किमी के क्षेत्र को बफर जोन में परिवर्तित करने के लिए भारतीय सेना पर दबाव डाला था। फिलहाल लद्दाख के मोर्चे पर यह सवाल सबसे बड़ा है कि आखिर पीछे कौन हट ...