भारत उपमहाद्वीप में बार-बार और हर बार पहले से घातक तूफान आने का असल कारण इंसान द्वारा किए जा रहे प्रकृति के अंधाधुध शोषण से उपजी पर्यावरणीय त्रासदी ‘जलवायु परिवर्तन’ भी है। ...
15 लाख 39 हजार 822, लेकिन इनमें से भी मात्र 36.81 प्रतिशत लोग ही वोट डालने गए। यहां से विजेता मेयर पद की प्रत्याशी को 350905 वोट मिले अर्थात कुल मतदाता के महज 22 फीसदी की पसंद का मेयर। ...
टारबॉल काले-भूरे रंग के ऐसे चिपचिपे गोले होते हैं जिनका आकार फुटबॉल से लेकर सिक्के तक होता है. ये समुद्र तटों की रेत को भी चिपचिपा बना देते हैं और इनसे बदबू तो आती ही है. ...
हमारे देश की नियति है कि थोड़ा ज्यादा बादल बरस जाएं तो उसको समेटने के साधन नहीं बचते और कम बरस जाए तो ऐसा रिजर्व स्टॉक नहीं दिखता जिससे काम चलाया जा सके। अनुभवों से यह तो स्पष्ट है कि भारी-भरकम बजट, राहत, नलकूप जैसे शब्द जल संकट का निदान नहीं है। ...
एक अनुमान के अनुसार इस साल कोई 33 लाख मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पादित होगा. यदि इसके सुरक्षित निपटारे के लिए अभी से प्रयास नहीं हुआ तो धरती, हवा और पानी में इतना जहर घुल जाएगा कि उससे निपटना मुश्किल हो जाएगा. ...
भारत की गिनती दुनिया के 10 सबसे अधिक वन-समृद्ध देशों में होती है। यहां लगभग 809 लाख हेक्टेयर में पेड़ हैं, जो कि पूरे देश का लगभग 25 फीसदी है लेकिन यह भी कड़वा सच है कि इसमें लगातार गिरावट आ रही है। ...
हिंद महासागर के बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित 572 द्वीपों का समूह अंडमान निकोबार इन दिनों अलग द्वंद्व से गुजर रहा है. यहां कांक्रीटीकरण के साथ बाहरी लोगों को बसाने की योजना तैयार की जा रही है. ...