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उत्तरी अफगानिस्तान के प्रमुख शहर पर कब्जा करने के बाद काबुल के करीब पहुंचे तालिबान

By भाषा | Updated: August 15, 2021 00:35 IST

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काबुल, 14 अगस्त (एपी) तालिबान ने उत्तरी अफगानिस्तान में एक बड़े और मजबूत रक्षा पंक्ति वाले शहर पर कब्जा कर लिया है, जो अफगान सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। साथ ही, अमेरिका के अपने सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया पूरी करने से पहले ही तालिबान राजधानी काबुल के नजदीक पहुंच गया है।

अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर शनिवार को चौतरफा हमलों के बाद तालिबान का कब्जा हो गया। एक सांसद ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही, तालिबान का पूरे उत्तरी अफगानिस्तान पर कब्जा हो गया और अब सिर्फ मध्य और पूर्वी हिस्से ही सरकार के नियंत्रण में रह गये हैं।

बल्ख के सांसद अबास इब्राहिमज़ादा ने कहा कि प्रांत की राष्ट्रीय सेना के कोर ने पहले आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद सरकार समर्थक मिलिशिया और अन्य बलों ने मनोबल खो दिया और हार मान ली।

उन्होंने कहा कि हजारों लड़ाकों का नेतृत्व करने वाले अब्दुल राशिद और अता मोहम्मद नूर प्रांत से भाग गये हैं और उनका कोई अता-पता नहीं है।

तालिबान ने हाल के दिनों में बहुत आगे बढ़ा है। उसने हेरात और कंधार पर कब्जा कर लिया जो देश के क्रमश: दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर हैं। उनका अब 34 प्रांतों में करीब 22 पर कब्जा है।

बाद में आतंकवादियों ने बगैर लड़ाई के ही लगमान प्रांत की राजधानी मिहतेरलम पर कब्जा कर लिया। प्रांत के सांसद जेफोन सफी ने यह जानकारी दी।

तालिबान ने उत्तरी फरयाब प्रांत की राजधानी मैमाना पर भी कब्जा कर लिया है। प्रांत की एक सांसद फौजिया रऊफी ने यह जानकारी दी।। मैमाना का तालिबान ने एक महीने से घेरा डाल रखा था और तालिबान लड़ाके कुछ दिन पहले शहर में घुसे थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने विरोध किया लेकिन आखिरकार शनिवार को आत्मसमर्पण कर दिया।

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्णतया वापसी में तीन सप्ताह से भी कम समय बचा है और ऐसे में तालिबान ने उत्तर, पश्चिम और दक्षिण अफगानिस्तान के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। इसके कारण यह आशंका बढ़ गई है कि तालिबान फिर से अफगानिस्तान पर कब्जा कर सकता है या देश में गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

इससे पहले, लोगार से सांसद होमा अहमदी ने शनिवार को बताया कि तालिबान ने पूरे लोगार पर कब्जा कर लिया है और प्रांतीय अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। उन्होंने बताया कि तालिबान काबुल के दक्षिण में मात्र 11 किलोमीटर दूर चार असयाब जिले तक पहुंच गया है।

बाद में, विद्रोहियों ने काबुल के उत्तर-पूर्व में लगमन प्रांत की राजधानी मिहतरलाम पर बिना किसी लड़ाई के कब्जा कर लिया। प्रांत के एक सांसद ज़ेफ़ोन सफ़ी ने यह जानकारी दी।

आतंकवादियों ने पाकिस्तान की सीमा से लगे पक्तिया की राजधानी पर भी कब्जा कर लिया। यह जानकारी प्रांत से सांसद खालिद असद ने दी।

पड़ोसी पक्तिका प्रांत के एक सांसद सैयद हुसैन गरदेजी ने कहा कि तालिबान ने स्थानीय राजधानी गरदेज के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया है लेकिन सरकारी बलों के साथ लड़ाई जारी है। तालिबान ने कहा कि शहर पर उनका कब्जा हो गया है।

इस बीच, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि वह 20 वर्षों की “उपलब्धियों” को बेकार नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान के हमले के बीच ‘विचार-विमर्श’ जारी है। उन्होंने शनिवार को टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया। हाल के दिनों में तालिबान द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा जमाए जाने के बाद से यह उनकी पहली सार्वजनिक टिप्पणी है।

अमेरिका ने इस हफ्ते कतर में सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता जारी रखी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चेतावनी दी है कि बलपूर्वक स्थापित तालिबान सरकार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गनी ने कहा, ‘‘हमने सरकार के अनुभवी नेताओं, समुदाय के विभिन्न स्तरों के प्रतिनिधियों और हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।’’ उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा, ‘‘जल्द ही आपको इसके परिणाम के बारे में बताया जाएगा।’’

गनी मजार-ए-शरीफ को बचाने की कोशिशों के तहत बुधवार को शहर गए थे और उन्होंने हजारों लड़ाकों की कमान संभालने वाले अब्दुल राशिद दोस्तम और अता मोहम्मद नूर समेत सरकार से संबद्ध कई मिलिशिया कमांडरों के साथ बैठक की थी।

ये मिलिशिया कमांडर सरकार की ओर हैं, लेकिन अफगानिस्तान में पहले हुई लड़ाइयों में क्षत्रपों को अपने बचाव के लिए पाला बदलने के लिए जाना जाता रहा है।

तालिबान ने देश के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहरों हेरात और कंधार समेत कई स्थानों पर अपना कब्जा कर लिया है। देश के 34 में से 18 प्रांतों पर उसका कब्जा है।

विदेशी बलों की वापसी और वर्षों में अमेरिका से मिली सैकड़ों अरब डॉलर की मदद के बावजूद अफगानिस्तान से बलों के पीछे हटने के कारण यह आशंका बढ़ गई है कि तालिबान फिर से देश पर कब्जा कर सकता है या देश में गुटीय संघर्ष छिड़ सकता है, जैसा कि 1989 में वहां से सोवियत संघ के जाने के बाद हुआ था।

अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से पैर पसारने के बीच अमेरिकी दूतावास को आंशिक रूप से खाली करने में मदद करने के लिए अमेरिका की मरीन बटालियन का 3,000 कर्मियों का दस्ता शुक्रवार को यहां पहुंचा। शेष जवानों के रविवार को पहुंचने की संभावना है।

इस बीच, कनाडा सरकार ने घोषणा की है कि वह तालिबान आतंकवादियों द्वारा शुरू किए गए घातक हमले के बीच युद्धग्रस्त देश से पलायन कर रहे सिखों और हिंदुओं सहित 20,000 'संवेदनशील' अफगानों को स्थायी रूप से अपने यहां बसाएगी।

कनाडा सरकार ने एक बयान में कहा, ''कनाडा अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति और कई कमजोर अफगानों के समक्ष पैदा हुए जोखिम को लेकर बेहद चिंतित है। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के हिस्सों पर कब्जा किये जाने से अफगानों का जीवन खतरे में है। कई लोग पहले ही देश छोड़कर भाग चुके हैं।''

इस बीच, अमेरिकी वायुसेना ने अफगान गठबंधन के समर्थन में कई हवाई हमले किए लेकिन इससे तालिबान के आगे बढ़ने पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। एक बी-52 बमवर्षक विमान और अन्य युद्धक विमानों ने देश के हवाई क्षेत्र में उड़ानें भरीं।

तालिबान ने शनिवार को कंधार में एक रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। तालिबान ने एक वीडियो जारी किया जिसमें एक अज्ञात तालिबानी आतंकवादी ने शहर के मुख्य रेडियो स्टेशन को कब्जे में लेने की घोषणा की। रेडियो का नाम बदलकर ‘वॉइस ऑफ शरिया’ कर दिया गया है। उसने कहा कि सभी कर्मचारी यहां मौजूद हैं, वे समाचार प्रसारित करेंगे, राजनीतिक विश्लेषण करेंगे और कुरान की आयतें पढ़ेंगे। ऐसा लगता है कि स्टेशन पर अब संगीत नहीं बजाया जाएगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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