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नेपाल में डीडी न्यूज के अलावा सभी भारतीय न्यूज टीवी चैनल के प्रसारण पर बैन

By सतीश कुमार सिंह | Updated: July 9, 2020 20:37 IST

भारत और नेपाल में कई दिन से सीमा पर तनाव चल रहा है। कई दिनों से दोनों देश में मनमुटाव जारी है।

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ठळक मुद्देनेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के भीतर पैदा हुए मतभेद समाप्त होते नहीं दिख रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के बीच सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक बैठकें होने के बाद भी कोई आम सहमति नहीं बन सकी है।

काठमांडूः नेपाल में डीडी न्यूज के अलावा सभी भारतीय न्यूज टीवी चैनल के प्रसारण पर बैन कर दिया गया है। भारत और नेपाल में कई दिन से सीमा पर तनाव चल रहा है। कई दिनों से दोनों देश में मनमुटाव जारी है।

चीनी शह पर नेपाल ने यह कारनामा किया है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली मुश्किल का सामना कर रहे हैं। नेपाल ने सीमा विवाद के बाद कार्रवाई करते हुए भारतीय न्यूज टीवी चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी है। कहा जा रहा है कि नेपाल ने इसे लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है लेकिन नेपाल के केबल टीवी ऑपरेटर भारतीय न्यूज चैनलों का प्रसारण नहीं कर रहे हैं। नेपाल में बैन किए गए चैनलों में डीडी न्यूज को शामिल नहीं किया गया है।

नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के भीतर पैदा हुए मतभेद समाप्त होते नहीं दिख रहे हैं। बृहस्पतिवार को आयी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के बीच सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक बैठकें होने के बाद भी कोई आम सहमति नहीं बन सकी है।

नेपाल ने बृहस्पतिवार को दूरदर्शन को छोड़कर अन्य सभी भारतीय समाचार चैनलों का प्रसारण बंद करते हुए आरोप लगाया कि वो ऐसी खबरें दिखा रहे हैं जिससे देश की राष्ट्रीय भावनाएं आहत हो रही हैं। इस मुद्दे पर भारत की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

घटनाक्रम के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में नेपाली दूतावास ने भारत सरकार को भारतीय चैनलों द्वारा नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर की जा रही कवरेज पर अपने नजरिये से अवगत करा दिया है। मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) के अध्यक्ष, विदेशी चैनल के वितरक दिनेश सुबेदी ने यहां संवाददाताओं को बताया, “हमनें दूरदर्शन को छोड़कर सभी भारतीय समाचार चैनलों का प्रसारण रोक दिया है।”

हमने भारत के निजी समाचार चैनलों का प्रसारण रोक दिया है

उन्होंने कहा, “हमने भारत के निजी समाचार चैनलों का प्रसारण रोक दिया है क्योंकि वे नेपाल की राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने वाली खबरें दिखा रहे थे।” कुछ भारतीय चैनलों द्वारा प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और उनकी सरकार की आलोचना वाली खबरें प्रसारित करने के बाद यह कदम आया है। नेपाल सरकार ने हालांकि आधिकारिक रूप से भारतीय समाचार चैनलों का प्रसारण रोके जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

वित्त, सूचना एवं संचार मंत्री युवराज खातीवाड़ा ने भारतीय समाचार चैनलों द्वारा प्रसारित कुछ खबरों की निंदा की। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान यहां कहा, “नेपाल सरकार ऐसे कृत्यों की आलोचना करती है। सरकार ऐसे आपत्तिजनक कृत्य के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।”

इससे पहले दिन में पूर्व उप प्रधानमंत्री और सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि भारतीय मीडिया को प्रधानमंत्री ओली और उनकी सरकार के खिलाफ “निराधार प्रचार रोकना चाहिए।”

एनसीपी की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार तक के लिए टाल दी गयी

बुधवार को एनसीपी की 45 सदस्यीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार तक के लिए टाल दी गयी। यह लगातार चौथा मौका था जब पार्टी की बैठक टाल दी गयी थी ताकि पार्टी के दो अध्यक्षों को मतभेदों को दूर करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उम्मीद की जा रही है कि 68 वर्षीय ओली के राजनीतिक भविष्य के बारे में शुक्रवार को स्थायी समिति की बैठक के दौरान फैसला किया जा सकता है। इस बीच नेपाल में चीनी राजदूत होउ यान्की की सक्रियता बढ़ गयी है ताकि ओली की कुर्सी को बचाया जा सके।

प्रचंड खेमे को वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों माधव कुमार नेपाल तथा झालानाथ खनल का समर्थन हासिल है। यह खेमा ओली के इस्तीफे की मांग कर रहा है और उसका कहना है कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी "न तो राजनीतिक रूप से सही थी और न ही राजनयिक रूप से उचित थी।"

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दो धड़ों के बीच मतभेद उस समय बढ़ गया जब प्रधानमंत्री ने एकतरफा फैसला करते हुए संसद के बजट सत्र का समय से पहले ही सत्रावसान करने का फैसला किया। काठमांडो पोस्ट की खबर के अनुसार ओली और प्रचंड के बीच कई दौर की बातचीत होने के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी। इस बीच विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्देश नहीं देने के संबंध में प्रचंड के साथ समझौता होने के बावजूद बुधवार को देश भर में ओली के समर्थन में छिटपुट प्रदर्शन हुए।

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