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केरल के मुख्यमंत्री से पश्चिमी घाट को हो रहे नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाने को कहा गया

By भाषा | Updated: November 5, 2021 22:35 IST

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(एच एच राव)

लंदन, पांच नवंबर ‘ब्रिटेन-केरल बिजनेस फोरम और फ्रेंड्स ऑफ केरल एमपीज’ ने केरल सरकार से आह्वान किया है कि पश्चिमी घाट की पहा़डियों पर हुए नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाए, जिसकी वजह से वर्ष 2016 से ही लगातार बाढ़ आ रही है।

मंच ने केरल के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप उनसे पश्चिमी घाट को पूर्व की स्थिति में लाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया।

ब्रिटेन- केरल व्यापार मंच के अगुआ एमपी वीरेंद्र शर्मा ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन पर कदम उठाना विकल्प नहीं है बल्कि जरूरत है। हमने लंबे समय तक इस ग्रह की उपेक्षा की। हम अपने व्यवहार की कीमत चुका रहे हैं।’’ शर्मा भारत-ब्रिटिश सर्वदलीय संसदीय समूह के भी अध्यक्ष हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पर्यावरण की बेतहरीन चीज का संरक्षण हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। केरल सुंदर स्थान है और हमें अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी के लिए इसे इसी रूप में रखने की पुरजोर कोशिश करनी होगी ताकि वे भी इन स्थानों की नैसर्गिक खूबसूरती को देख सके।’’

गौरतलब है कि भारत के पश्चिमी समुद्र तट से लगी पश्चिमी घाट की पहाड़ियां केरल के जलवायु में अहम भूमिका निभाती हैं। यह गर्मी के बाद दक्षिण पश्चिम से आने वाली आर्द्रता युक्त मानसून हवाओं को रोककर मौसम की परिपाटी को प्रभावित करती है।

मलयी समुदाय से संबद्ध और ईस्ट हैम के सांसद स्टीफन टिम्स ने कहा, ‘‘खूबसूरत केरल की पूरी दुनिया में पहचान है और मैंने खुद कभी नहीं भूलने वाली केरल की पहाड़ियों की यात्रा की है। राज्य जलवायु परिवर्तन से बहुत अधिक असुरक्षित है। ग्लासगो में दुनिया के नेता वैश्विक उपाय के लिए मिले हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वहां पर राज्य अधिकारियों द्वारा भी पर्यावरण चुनौतियों के लिए प्रभावी उपाय होगा।’’

केरल में वर्ष 2018 में आई बाढ़ के बाद केरल मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए धन जुटाने वाले स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद मार्टिन डे ने कहा, ‘‘जंगलों की कटाई ऐसा कुछ है जिससे निपटने के लिए हम सभी को भूमिका निभानी होगी। भविष्य के लिए वृक्षारोपण बहुत सकारात्मक कदम है क्योंकि स्कॉटलैंड ने हाल के वर्षों में इसका प्रदर्शन किया है और मैं सभी देशों को और करने के लिए प्रोत्साहित करूंगा।’’

ज्ञापन में केरल सरकार से आह्वान किया गया कि वह पड़ोसी राज्यों पर भी पश्चिमी घाट पर सभी तरह का निर्माण कार्य रोकने के लिए दबाव बनाए जिनमें कर्नाटक राज्य द्वारा प्रस्तावित और मंजूरी प्राप्त रेलवे लाइन भी शामिल है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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