तुर्की ने पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का मामला सऊदी अरब को स्थानांतरित किया, मानवाधिकार समूहों की चिंता को किया नजरअंदाज

By भाषा | Published: April 7, 2022 02:17 PM2022-04-07T14:17:26+5:302022-04-07T14:21:18+5:30

मानवाधिकार समूहों की आशंकाओं के बावजूद यह फैसला आया है। मानवाधिकार समूहों ने आगाह किया था कि सऊदी अरब को यह मामला स्थानांतरित करने से इस हत्या पर पर्दा डाल दिया जाएगा। ऐसा संदेह है कि इस हत्या के पीछे सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान का हाथ है। 

journalist jamal khashoggi-murder-trial-turkey-saudi-arabia | तुर्की ने पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का मामला सऊदी अरब को स्थानांतरित किया, मानवाधिकार समूहों की चिंता को किया नजरअंदाज

तुर्की ने पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का मामला सऊदी अरब को स्थानांतरित किया, मानवाधिकार समूहों की चिंता को किया नजरअंदाज

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Highlightsतुर्की की एक अदालत ने सऊदी अरब के 26 लोगों की अनुपस्थिति में मुकदमे को निलंबित कर दिया। तुर्की, सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है।मानवाधिकार पैरोकारों ने तुर्की से मामला सऊदी अरब स्थानांतरित न करने का अनुरोध किया था। 

इस्तांबुल (तुर्की): तुर्की की एक अदालत ने वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की निर्मम हत्या के आरोपी सऊदी अरब के 26 लोगों की अनुपस्थिति में मुकदमे को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया और मामला सऊदी अरब को स्थानांतरित कर दिया है। 

मानवाधिकार समूहों की आशंकाओं के बावजूद यह फैसला आया है। मानवाधिकार समूहों ने आगाह किया था कि सऊदी अरब को यह मामला स्थानांतरित करने से इस हत्या पर पर्दा डाल दिया जाएगा। ऐसा संदेह है कि इस हत्या के पीछे सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान का हाथ है। 

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब खशोगी की हत्या के बीच संबंधों के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तुर्की, सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है। 

मीडिया में आयी कुछ खबरों में दावा किया गया है कि रियाद ने तुर्की से संबंधों में सुधार लाने के लिए सऊदी अरब के लोगों के खिलाफ मामला वापस लेने की शर्त रखी है।

पिछले सप्ताह मामले में अभियोजक ने मुकदमे को सऊदी अरब स्थानांतरित करने की सिफारिश करते हुए दलील दी थी कि तुर्की में मुकदमे पर फैसला नहीं हो पाएगा। 

तुर्की के न्याय मंत्री ने सिफारिश का समर्थन करते हुए कहा कि अगर तुर्की की अदालत सऊदी अरब में मुकदमे की सुनवाई के नतीजों से संतुष्ट नहीं रहती है तो तुर्की में मुकदमा फिर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सऊदी अरब नया मुकदमा शुरू करेगा। 

मानवाधिकार पैरोकारों ने तुर्की से मामला सऊदी अरब स्थानांतरित न करने का अनुरोध किया था। 

एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्निस कैलामार्ड ने कहा, ‘‘तुर्की अपने क्षेत्र में की गयी हत्या के मामले को स्थानांतरित कर जानबूझकर मामला उन लोगों के हाथों में वापस भेज रहा है जो इसके जिम्मेदार हैं। निश्चित तौर पर सऊदी अरब ने तुर्की के अभियोजक के साथ बार-बार सहयोग करने से इनकार किया है और यह स्पष्ट है कि सऊदी अरब की अदालत द्वारा न्याय नहीं किया जा सकता है।’’ 

न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार निगरानी समूह ने कहा, ‘‘सऊदी अरब में न्यायिक स्वतंत्रता की कमी, खशोगी की हत्या में सऊदी अरब की भूमिका, न्याय बाधित करने की उसकी पूर्व की कोशिशों और निष्पक्षता के मूल मानदंडों को पूरा करने में नाकाम रहे एक आपराधिक न्यायिक तंत्र को देखते हुए सऊदी अरब में खशोगी के मामले के लिए निष्पक्ष मुकदमा चलाने की उम्मीद न के बराबर है।’’ 

अमेरिकी निवासी खशोगी दो अक्टूबर 2018 को इस्तांबुल में सऊदी अरब वाणिज्य दूतावास में प्रवेश करने के बाद गायब हो गए थे। खशोगी को उन दस्तावेजों की जरूरत थी जिससे उन्हें तुर्की की नागरिक हैटिस केंगिज से शादी करने की अनुमति मिलती। 

तुर्की के अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक खशोगी की हत्या की गयी और उनका शव क्षत-विक्षत कर दिया गया। उसने आरोप लगाया कि हत्या को अंजाम देने के लिए सऊदी अरब के एजेंटों का एक दल इस्तांबुल भेजा गया था। 

इस समूह में एक फॉरेंसिक डॉक्टर, खुफिया और सुरक्षा अधिकारी तथा शहजादे के कार्यालय के लिए काम करने वाले लोग शामिल थे। खशोगी का शव बरामद नहीं किया गया।

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