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दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है ताइवान?

By शिवेंद्र राय | Updated: August 3, 2022 13:24 IST

दुनिया के रोजाना इस्तेमाल के इलेक्ट्रॉनिक गैजेटों जैसे फोन, लैपटॉप, घड़ियों और गेमिंग उपकरणों में जो चिप लगते हैं, वे ज़्यादातर ताइवान में बनते हैं। दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियां भी चिप के मामले में ताइवान पर निर्भर हैं। ताइवान पर चीन के कब्जे का मतलब है सेमीकंटक्टर उद्योग पर भी चीन का संपूर्ण नियंत्रण। यही कारण है कि ताइवान पूरी दुनिया के लिए इतना अहम है।

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ठळक मुद्देसेमीकंटक्टर उद्योग में दुनिया में अग्रणी है ताइवानतकनीकी उत्पादों की जान सेमीकंडक्टर चिप्स में बसती हैयही कारण है कि ताइवान पूरी दुनिया के लिए इतना अहम है

नई दिल्ली: अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर दुनिया की दो महाशक्तियां अमेरिका और चीन आमने सामने हैं। चीन लगतार ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है। नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद से एक छोटा सा द्वीप देश ताइवान दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सारी दुनिया को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर चीन ने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की तो कहीं उनके अपने देश की रफ्तार न धीमी हो जाए। दरअसल ताइवान के पास एक ऐसी चीज है जिसे कोई और देश निकट भविष्य में आसानी से नहीं बना सकता है। ये है एक छोटी सी चिप जिसे सेमीकंडक्टर कहते हैं।

ताइवान पर निर्भर है पूरी दुनिया

सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में  ताइवान दुनिया की फैक्ट्री है। ये ताइवान का एक ऐसा उद्योग है जिसपर लड़ाकू विमानों से लेकर सोलर पैनल तक और वीडियो गेम्स से लेकर मेडिकल उपकरण उद्योग तक निर्भर हैं। सेमीकंडक्टर का इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, स्मार्टफोन, कारों के सेंसर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। दुनिया के लगभग सभी तकनीकी उत्पादों की जान इन्हीं चिप्स में बसती है। अगर दुनिया में इसकी किल्लत हुई तो कोई देश ऐसा नहीं होगा जिसकी अर्थव्यवस्था पर असर न पड़े। इसमें खुद चीन भी शामिल है। दुनिया के बाकी देशों की तरह चीन भी ताइवान में बनने वाली एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स पर ही निर्भर है।

सेमीकंडक्टर के उत्पादन में ताइवान की कितनी बड़ी भूमिका है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि ताइवान की एक कंपनी 'वन मेजर',दुनिया के आधे से अधिक चिप का उत्पादन करती है। 2021 में दुनिया का चिप उद्योग करीब 100 अरब डॉलर का था और इस पर ताइवान का दबदबा है। पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर उद्योग से जितना राजस्व जुटता है उसमें साठ प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी अकेले ताइवान की है।

दुनिया भर के बाजारों का गहन अध्ययन कर आंकड़े जुटाने वाली कंपनी ट्रेंडफोर्स के अनुसार वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन के मामले में ताइवान की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है। इस मामले में दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत और चीन की हिस्सेदारी केवल 5 प्रतिशत है। इन देशों के अलावा पूरी दुनिया की सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन में हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है।

ताइवान ने खुद को सेमीकंडक्टर के उत्पादन के मामले में अग्रणी बनाने का फैसला काफी सोच समझ कर लिया। साल 1987 में ताइवान की सरकार ने 'ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी' की स्थापना की थी। एक समय दुनिया को 92 प्रतिशत से ज्यादा चिप का निर्यात यही कंपनी कर रही थी। आज भी यह दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी है। दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियां भी चिप के मामले में ताइवान पर निर्भर हैं। यही कारण है कि ताइवान पूरी दुनिया के लिए इतना अहम है।

टॅग्स :Taiwanनैंसी पेलोसीNancy Pelosiजो बाइडनशी जिनपिंगxi jinping
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