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इजराइल-फलस्तीन वार्ता बहाल करने में सहायक माहौल बनाने की हर कोशिश की जानी चाहिए : भारत

By भाषा | Updated: May 21, 2021 12:48 IST

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(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 21 मई भारत ने रेखांकित किया है कि इजराइल और फलस्तीन के बीच वार्ता बहाल करने में सहायक माहौल तैयार करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरत कायम के लिए अर्थपूर्ण वार्ता का दौर लंबा चल सकता है।

पश्चिम एशिया और फलस्तीन की स्थिति पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की बुलाई गई बैठक में बोलते हुए भारत के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, ‘‘ हम लगातार जोर दे रहे हैं कि तत्काल तनाव को कम करना इस वक्त की जरूरत है ताकि हिंसा की कड़ी को तोड़ा जा सके। हम आह्वान करते हैं कि तनाव को बढ़ाने वाले किसी भी कदम से बचना चाहिए। इसके साथ ही एक तरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिश से भी बचना चाहिए।’’

तिरुमूर्ति की यह टिप्पणी इजराइल और हमास के बीच 11 दिन के संघर्ष के बाद बृहस्पतिवार को संघर्ष विराम की घोषणा के बीच आई है। इस संघर्ष में गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा के लिए बृहस्पतिवार को यह बैठक बुलाई थी और गत साल शुरू हुई महामारी के बाद पहली बार दर्जनों देशों के विदेशमंत्री आमने-सामने बैठकर इस बहस में शामिल हुए।

तिरुमूर्ति ने बहस में बोलते हुए कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पहल के बावजूद क्षेत्र में हिंसा जारी रहने पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा, ‘‘हम गाजा से इजराइल पर दागे जा रहे रॉकेट की निंदा करते हैं जिससे कई आम नागरिकों की मौत हुई है। दुर्भाग्य से भारत ने भी अपना एक नागरिक इन रॉकेट हमलों में - इजराइल के अश्केलोन में रहने वाली नर्स सौम्या संतोष- को खोया है।’’

तिरुमूर्ति ने कहा कि गाजा पर जवाबी हमले में भी मौतें एवं विध्वंस हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हिंसा की मौजूदा कड़ी में हम भारतीय नागरिक सहित निर्दोष लोगों की जान जाने से शोकाकुल हैं। हम एक बार फिर उकसावे, हिंसा और विध्वंस की सभी कार्रवाई की निंदा करते हैं।’’

भारत ने जोर देकर कहा कि हाल की घटनाओं ने एक बार फिर तत्काल इजराइल और फलस्तीन के बीच संवाद को बहाल करने की जरूरत को रेखांकित किया है।

तिरुमूर्ति ने कहा, ‘‘ आपसी विश्वास बहाल करने और दीर्घकालिक शांति और स्थिरता कायम करने के लिए सीधी और अर्थपूर्ण वार्ता को लंबा रास्ता तय करना होगा। हमारा मानना है कि इजराइल और फलस्तीन के बीच सीधी वार्ता बहाल करने में सहायक महौल तैयार करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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