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सावधान! कोरोना के 'ओमीक्रॉन' वेरिएंट पर दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिकों ने दी अब नयी चेतावनी

By विनीत कुमार | Updated: December 2, 2021 11:56 IST

कोरोना के नये वेरिएंट ओमीक्रॉन के बारे में सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पता चला और अब ये देश इससे सबसे बुरी तरह प्रभावित है। यहां बड़ी संख्या में ओमीक्रोन वेरिएंट के मामले आ रहे हैं।

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ठळक मुद्देओमीक्रॉन वेरिएंट पर मचे हंगामे के बीच दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी।वैज्ञानिकों के अनुसार ओमीक्रोन केवल मामलू रूप से बीमार करता है, ऐसा अभी सोचना जल्दबाजी है।वैज्ञानिकों के अनुसार अभी ये ज्यादातर युवाओं को चपेट में ले रहा है लेकिन बुजुर्ग भी इसके असर में आ सकते हैं, फिर ये खतरनाक होगा।

केपटाउन: दुनिया भर में कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन वेरिएंट पर मचे हंगामे के बीच दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने इसे लेकर एक नयी चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी यह निर्धारित करना जल्दबाजी होगी कि ओमीक्रोन वेरिएंट से संक्रमित होने पर केवल हल्के लक्षण ही नजर आएंगे।

वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोना वायरस स्ट्रेन का सही प्रभाव वर्तमान में निर्धारित करना कठिन है क्योंकि इसने अब तक ज्यादातर युवा लोगों को ही प्रभावित किया है, जो रोगों से लड़ने की बेहतर क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीकी सांसदों के सामने ओमीक्रॉन के बारे में बताते हुए ये बात कही।

दक्षिण अफ्रीका में दोगुने आने लगे कोरोना मामले

इससे पहले नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) ने बुधवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में दक्षिण अफ्रीका में नए पुष्ट कोरोना मामलों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 8,561 हो गई है। देश में ओमाइक्रोन अब सबसे प्रमुख फैल रहा वेरिएंट बन गया है।

एनआईसीडी में सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और रिस्पॉन्स के प्रमुख मिशेल ग्रोम ने बुधवार को सांसदों को बताया, 'नये संक्रमण ज्यादातर कम आयु के लोगों में हुआ है, लेकिन अब हम इसे वृद्ध लोगों की ओर से बढ़ते देख रहे हैं। हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि अधिक गंभीर जटिलताएं कुछ हफ्तों तक नहीं आएंगी।'

बता दें कि 25 नवंबर को दक्षिण अफ्रीकी सरकार और वैज्ञानिकों ने नया वेरिएंट मिलने की घोषणा की थी। इसे बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से ओमीक्रोन नाम दिया गया।

ओमीक्रोन क्यों बन सकता है खतरा

दक्षिण अफ्रीका के KRISP जेनोमिक्स इंस्टीट्यूट के एक विशेषज्ञ रिचर्ड लेसेल्स ने कहा कि कुछ लोगों में दूसरे वेरिएंट से हो चुके संक्रमण की वजह से भी नए वेरिएंट की गंभीरता कम नजर आ रही होगी। पहले के संक्रमण से ऐसे में लोगों में एक तरह की इम्यूनिटी आ जाती है।

हालांकि, चिंता वाली बात ये है कि पश्चिमी देशों और चीन की तुलना में दक्षिण अफ्रीका में टीकाकरण की दर काफी कम है। वैसे, ये अन्य कई अफ्रीकी देशों से काफी ऊपर भी है। लगभग एक चौथाई आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा सका है। 1.3 अरब लोगों के इस महाद्वीप में केवल 6.7% लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में 100 मिलियन लोगों में से केवल 0.1% लोगों को टीके के सभी डोज लगे हैं।

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