Coronavirus covid-19 not function seasonally like other viruses WHO showed outbreaks in winter and summer | कोविड-19 अन्य वायरस की तरह मौसम के हिसाब से नहीं चलता, डब्ल्यूएचओ ने कहा-सर्दी और गर्मी में प्रकोप दिखा
कुछ वैज्ञानिकों और नेताओं ने पहले पूर्वानुमान जताया था कि गर्मियों में कोरोना वायरस का असर कम हो जाएगा।

Highlightsकदम उठाते रहने के लिए लगातार परामर्श दे रही है जहां कोविड-19 काबू में आता दिख रहा है, जिनमें यूरोप के भी कुछ देश शामिल हैं। इन्फ्लुएंजा जैसे वायरस संक्रमण जहां मुख्य रूप से सर्दी में होते हैं, वहीं कोरोना वायरस महामारी गर्मियों में भी प्रकोप दिखा रही है।

लंदनः विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपात सेवा प्रमुख ने कहा है कि कोविड-19 अन्य वायरस की तरह मौसम के हिसाब से नहीं चलता। इन्फ्लुएंजा जैसे वायरस संक्रमण जहां मुख्य रूप से सर्दी में होते हैं, वहीं कोरोना वायरस महामारी गर्मियों में भी प्रकोप दिखा रही है।

जबकि कुछ वैज्ञानिकों और नेताओं ने पहले पूर्वानुमान जताया था कि गर्मियों में कोरोना वायरस का असर कम हो जाएगा। डॉ माइकल रियान ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘‘वायरस ने अब तक मौसम के हिसाब से पैटर्न नहीं दिखाया है। इसने स्पष्ट दिखाया है कि अगर आप वायरस से दबाव हटाते हैं तो यह पटलवार करता है।’

रियान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी उन देशों को भी वायरस का प्रकोप कम करने के लिए कदम उठाते रहने के लिए लगातार परामर्श दे रही है जहां कोविड-19 काबू में आता दिख रहा है, जिनमें यूरोप के भी कुछ देश शामिल हैं।

कोविड-19 के कारण उपभोक्ताओं के व्यवहार में स्थायी रूप से बदलाव संभव : सर्वेक्षण

एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कोविड​​-19 महामारी से उपभोक्ता व्यवहार में स्थायी रूप से बदलाव होने और उपभोक्ता वस्तुओं और खुदरा उद्योगों में स्थायी संरचनात्मक परिवर्तन होने की संभावना है। एसेंचर कोविड-19 कंज्यूमर पल्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय सामान और ब्रांड की मांग बढ़ रही है क्योंकि उपभोक्ता अपने सुरक्षित दायरे से बाकर निकलकर अपने पुराने उपभोग की पद्धति को ओर लौटने से झिझक रहे हैं।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि मार्च और जून के बीच वैश्विक स्तर पर 45,000 उत्तरदाताओं में से 2,500 उपभोक्ता भारत के हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण के भारत के हिस्से में पाया गया है कि 90 प्रतिशत उपभोक्ता अपने जीवन, कार्य और उपभोग के तौर तरीकों में स्थायी बदलाव करने के मूड हैं और वे उपभोक्ता ब्रांडों को लेकर महामारी-पूर्व की दुनिया में वापस नहीं लौटने जा रहे हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि महामारी अधिक लोगों को ऑनलाइन किराने का सामान खरीदने के लिए प्रेरित कर रही है।

होम डिलीवरी, चैट फीचर्स और वर्चुअल कंसल्टिंग जैसे ओमनीकल सेवाओं की मांग बढ़ रही है

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, डिजिटल कॉमर्स तथा होम डिलीवरी, चैट फीचर्स और वर्चुअल कंसल्टिंग जैसे ओमनीकल सेवाओं की मांग बढ़ रही है। इन चीजों के इस संकट के बाद भी कायम रहने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता अब अपनी सबसे बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि गैर-वाजिब चीजों पर कटौती की जा रही है। भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि वे सचेत रूप से अधिक स्वास्थ्य चिंता के साथ की खरीदारी कर रहे हैं और खाद्य बर्बादी को सीमित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

जबकि, 75 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उत्पादों की खरीदारी के दौरान वे अधिक लागत के प्रति सजग हो रहे हैं और 71 प्रतिशत को लगता है कि खरीद निर्णयों में गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वास सबसे अधिक मायने रखने लगा है। अधिकांश उत्तरदाताओं ने अब अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘घर पर रहना और घर से काम करना आदर्श बन रहा है। महामारी के कारण, जिस तरह से लोग अपना ख़ाली समय बिताते थे, वह बदल रहा है। इन आदतों के आगे भी जारी रखने की संभावना है।"

सर्वेक्षण में कहा गया है कि सर्वेक्षण में कहा गया है कि मनोरंजन, शिक्षण और डीआईवाई (इसे स्वयं करें) में भी वृद्धि देखी गई है - यह प्रवृत्ति उन ऐप के प्रकारों में परिलक्षित होती है जिन्हें उपभोक्ता डाउनलोड कर रहे हैं और वे डिवाइस खरीद रहे हैं जो मनोरंजन, समाचार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा से संबंधित हैं। 

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