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ब्लिंकन ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के फैसले के मद्देनजर अफगानिस्तान की यात्रा की

By भाषा | Updated: April 15, 2021 19:20 IST

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काबुल, 15 अप्रैल (एपी) अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अमेरिका के सबसे लंबे समय तक चलने वाले युद्ध को समाप्त करने और अफगानिस्तान से सभी सैनिकों की वापसी के संबंध में राष्ट्रपति जो बाइडन के फैसले के मद्देनजर बृहस्पतिवार को यहां की अघोषित यात्रा की।

ब्लिंकन ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि बाइडन की घोषणा के बावजूद अमेरिका उनके देश के लिए प्रतिबद्ध है।

बाइडन ने एक दिन पहले ही घोषणा की थी कि अफगानिस्तान से शेष 2,500 अमेरिकी सैनिकों की 11 सितंबर तक वापसी हो जाएगी।

ब्लिंकन ने अफगान नेतृत्व को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि सैनिकों की वापसी का मतलब अमेरिका-अफगान संबंध का अंत नहीं है।

ब्लिंकन ने काबुल में राष्ट्रपति के महल में गनी से मुलाकात की और कहा "साझेदारी बदल रही है, लेकिन यह साझेदारी स्थायी है।"

गनी ने कहा, ‘‘हम फैसले का सम्मान करते हैं और अपनी प्राथमिकताओं को समायोजित कर रहे हैं। " उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के बलिदान के लिए आभार जताया।

बाद में अब्दुल्ला के साथ मुलाकात के दौरान ब्लिंकन ने कहा, "अब हमारे सामने एक नया अध्याय है, लेकिन यह ऐसा नया अध्याय है जिसे हम साथ मिलकर लिख रहे हैं।"

अब्दुल्ला ने कहा, "हम आपके लोगों, आपके देश, आपके प्रशासन के आभारी हैं।"

बाइडन की घोषणा के तुंरत बाद नाटो ने भी कहा कि अफगानिस्तान में उसके करीब 7,000 गैर-अमेरिकी सैनिक कुछ महीनों के भीतर वापस बुला लिये जाएंगे और इसके साथ ही अफगानिस्तान में विदेशी सेना की उपस्थिति समाप्त हो जाएगी। अफगानिस्तान में करीब 40 साल से अधिक समय से संघर्ष चल रहा है।

ब्लिंकन ब्रसेल्स से काबुल पहुंचे। ब्रसेल्स में उन्होंने तथा अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने नाटो अधिकारियों के साथ इस संबंध में चर्चा की। नाटो प्रमुख जेन्स स्टॉलटेनबर्ग ने घोषणा की कि गठबंधन सेना भी अफगानिस्तान से लौट जाएगी।

अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर संसद सदस्य नहीद फरीद ने संवाददाताओं से कहा, "मेरे विचार काफी निराशावादी हैं।" फरीद सहित कई नेताओं ने काबुल में अमेरिकी दूतावास में ब्लिंकन से मुलाकात की थी। इन नेताओं में फरीद सहित ज्यादातर महिला नेता थीं। फरीद ने हालांकि विस्तार से आ बारे में बताने से इनकार कर दिया।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 20 साल के दौरान अरबों डॉलर की अमेरिकी सहायता के बावजूद भी अफगानिस्तान में गरीबी दर 52 प्रतिशत है। यानी अफगानिस्तान के 3.6 करोड़ लोगों में से आधे से अधिक रोजाना 1.90 डॉलर से कम पर गुजर-बसर कर रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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