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ऑस्ट्रेलियाई कानून ने सरकारी एजेंसियों को अधिकृत रूप से हैकिंग, निगरानी का अधिकार दिया

By भाषा | Updated: November 29, 2021 16:45 IST

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(मोनिक मान, डायकिन यूनिवर्सिटी और एंगस मर्री, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न क्वींसलैंड)

(संपादक: इम्बार्गो : भारतीय समयानुसार 7.00 बजे 03/12/2021)

गीलॉन्ग (ऑस्ट्रेलिया), 29 नवंबर (360 इंफो) व्यापक आलोचना के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में पारित नया आईडी कानून पुलिस और खुफिया एजेंसियों को उनकी सीमाओं से परे पहुंच प्रदान करता है। सांसदों ने कानूनी एजसेंयों को तीन नयी शक्तियां प्रदान की हैं: डेटा व्यवधान वारंट, नेटवर्क गतिविधि वारंट और खाता अधिग्रहण वारंट।

ये शक्तियां संघीय अधिकारियों के डिजिटल क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में काम आएंगी। डेटा व्यवधान वारंट ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस या ऑस्ट्रेलियाई आपराधिक खुफिया आयोग को ‘‘ऑनलाइन गंभीर अपराधों के लिए डेटा को संशोधित करने, जोड़ने, कॉपी करने या हटाने’’ की अनुमति देता है। नेटवर्क गतिविधि वारंट आपराधिक समूहों की कंप्यूटर से संबंधित गतिविधियों की निगरानी को सक्षम बनाता है, जैसे कि वाट्सऐप चैट या आई मैसेज टेक्स्ट की गुप्त रूप से निगरानी करना।

यदि कोई संदेह है कि कोई गंभीर अपराध हो रहा है तो एजेंसियां एक खाता अधिग्रहण वारंट का उपयोग करके किसी के ऑनलाइन खातों को नियंत्रित कर सकती हैं, उपयोगकर्ता को ई-मेल और सोशल मीडिया जैसी सेवाओं से बाहर कर सकती हैं, और खातों को स्वयं संचालित कर सकती हैं।

इन तीन शक्तियों को सहायता आदेशों के साथ जोड़ा गया है जो व्यवसायों और व्यक्तियों को वारंट को सुविधाजनक बनाने में मदद करने के लिए मजबूर करते हैं। कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सहायता करने से इनकार करने या विफल होने पर दस साल तक की जेल हो सकती है।

न केवल ये नयी क्षमताएं निजता में दखल दे रही हैं बल्कि संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के फोकस में बदलाव हैं। परंपरागत रूप से, एएफपी और एसीआईसी का प्रेषण विशिष्ट अपराधों के स्वीकार्य साक्ष्य एकत्र करने के लिए किया गया है। अब, ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल निदेशालय की सहायता से, संघीय कानून प्रवर्तन प्राधिकरण आक्रामक हो रहे हैं।

चिंता का कारण

यह उम्मीद की जाएगी कि संघीय पुलिस केवल बहुत गंभीर अपराधों के संदिग्ध लोगों को हैक या सर्वेक्षण कर सकती है। वास्तव में, आईडी कानून के तहत व्यावहारिक रूप से किसी का भी ‘‘इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े समूह’’ के हिस्से के रूप में सर्वेक्षण किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के ‘ह्यूमन राइट्स लॉ सेंटर’ का कहना है कि आईडी कानून समूह को इतने ‘‘बेतुके’’ रूप से परिभाषित करता है कि अगर एक व्यक्ति आईफोन पर वाट्सऐप पर अपराध करता है तो किसी भी वाट्सऐप उपयोगकर्ता या आईफोन के मालिक पर नजर रखी जा सकती है।

नेटवर्क गतिविधि वारंट जारी किए जा सकते हैं, भले ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े समूह में व्यक्तियों की पहचान का पता लगाया जा सकता है या नहीं। वारंट तब भी जारी किए जा सकते हैं जब प्रासंगिक अपराधों का विवरण स्पष्ट रूप से नहीं दिया जा सकता है, या जहां यह स्पष्ट नहीं है कि समूह संरचना समय के साथ बदल गई है या नहीं।

इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां न केवल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों का सर्वेक्षण और बाधित कर सकती हैं, बल्कि विदेशों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को प्रभावी ढंग से सीमाओं से परे अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं। न्यायिक अधिकारियों को ऐसा करने के लिए अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर के कार्यों को अधिकृत करने की भी आवश्यकता है।

इन सभी चिंताओं को आईडी कानून के पारित होने से पहले उठाया गया था। खुफिया और सुरक्षा पर संसदीय संयुक्त समिति (पीजेसीआईएस) ने भी कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं, जिनमें से कई को खारिज कर दिया गया।

पीजेसीआईएस द्वारा कई नीतिगत सुझाव दिए गए थे जो आईडी अधिनियम में सुधार कर सकते थे। नीति निर्माताओं को इन सिफारिशों को वापस लाने में देर नहीं हुई है।

आईडी कानून के तहत दी गई शक्तियां विस्तृत हैं। यह निगरानी करना महत्वपूर्ण होगा कि इन नयी शक्तियों का उपयोग कैसे और किस उद्देश्य से किया जाता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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