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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, 'चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत इंटरपोल का गलत इस्तेमाल कर रहा है'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 31, 2022 22:09 IST

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन इंटपोल की मदद से अपने हित साध रहा है और इसका गलत प्रयोग कर रहा है।

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ठळक मुद्देचीन इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस सिस्टम से अपने विरोधियों को पकड़ने में मदद ले रहा हैएमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक साल 2016 से चीन का इंटरपोल पर प्रभाव तेजी से बढ़ा हैअपनी विस्तारवादी नीति को प्रभावी बनाने के लिए चीन इंटरपोल का सहारा ले रहा है

बीजिंग:चीन पर आरोप लग रहा है कि वो इंटरपोल जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अपने हितों के अनुरूप प्रयोग करता है। इसके अलावा वो इंटरपोल द्वारा जारी होने वाले रेड कॉर्नर नोटिस सिस्टम के जरिेये अपने विरोधियों को पकड़ने में मदद ले रहा है। इस बात की जानकारी एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दी है।

बताया जा रहा है कि साल 2016 से चीन इंटरपोल पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इस मामले में अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि अपनी विस्तारवादी नीति को प्रभावी बनाने के लिए चीन अपनी आर्थिक शक्ति का भी उपयोग कर रहा है।

इसी के तहत चीन ने इंटरपोल के अध्यक्ष के तौर पर चीनी सार्वजनिक सुरक्षा के उपाध्यक्ष मेंग होंगवेई की नियुक्ति कराई। होंगवेई की नियुक्ति के बाद से आशंका व्यक्त की जा रही थी कि वो चीन को विदेश में बैठे असंतुष्टों का पीछा करने के इंटरपोल के संसाधनो के अनुमति दे सकते हैं और कई केसों में ऐसा होता हुआ दिखाई दे रहा है।

कई देश चीन द्वारा इंटरपोल के रेड नोटिस सिस्टम (आरएनएस) के दुरुपयोग करने के लिए कड़ी आलोचना कर रहे हैं। रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा दुनिया भर के देशों में अन्तर्राष्ट्रीय अपराधियों को पकड़ने के लिए जारी किया जाता है।

चीन अपने विरोधियों के खिलाफ इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस का जमकर प्रयोग कर रहा है। इसके तहत वो विरोधियों के अंतरराष्ट्रीय बैंक खाते फ्रीज करने और उनकी यात्रा प्रतिबंधों को बढ़ाने का उपाय करता है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई जांच में पता चला कि चीनी सरकार ने 2017 और 2021 के बीच शिनजियांग में केवल नजरबंदी शिविरों में ही मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया बल्कि इसके साथ साथ-साथ शिविरों के बाहर भी लोगों को कई तरह की यातनाएं दी गईं।

इसके साथ ही एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीनी सरकार द्वारा उइगर, कज़ाखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ कारावास, यातना और अन्य उत्पीड़न के बारे में विस्तार से साक्ष्य प्रस्तुत किया है।

एमनेस्टी की रिपोर्टों के अनुसार 2016 के बाद से चीनी सरकार द्वारा शिनजियांग के पुनर्शिक्षा शिविरों के नाम पर एक मिलियन से अधिक उइगर मुसलमानों को हिरासत में लिया गया है। इन पुनर्शिक्षा शिविरों का मुख्य उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा को सिखाना होता है।

इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने चीनी अधिकारियों पर अल्पसंख्यकों से जबरन श्रम, जबरन जन्म नियंत्रण, शारीरिक यातना और कैदी माता-पिता से उनके बच्चों को अलग करने का भी आरोप लगाया है।

मानवाधिकार संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि साल 2015 में ऑपरेशन स्काईनेट के तहत चीन ने कथित आर्थिक भगोड़ों को स्वदेश लाने के लिए 100 से अधिक रेड नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से 51 को उस नोटिस के आधार पर चीन वापस भेजा गया।

बताया जा रहा है कि चीन लौटे 51 कथित अपराधियों' में से 35 ने नोटिस जारी होने के बाद स्वेच्छा से लौटने का फैसला किया वहीं 16 चीनी सरकार के अत्यधिक दबाव और धमकियों के कारण वापस लौटे।

टॅग्स :Amnesty InternationalChinaInterpol
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