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अफगान सिखों को अपनाना होगा इस्लाम , नहीं तो छोड़ना होगा देश : रिपोर्ट

By दीप्ती कुमारी | Updated: October 22, 2021 16:53 IST

अफगानिस्तान में अफगान सिखों के लिए स्थिति बेहद खराब होती जा रही है , यहां सिखों को रहने के लिए अपना धर्म तक बदलना होगा ।

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ठळक मुद्देअफगानिस्तान में सिखों के लिए हालात बद से बदतरकई सिख समुदाय के लोग भारत वापस आ गए हैंसिखों पर जबरन इस्लाम अपनाने का दवाब बनाया जा रहा है

काबुल : अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद हालात बिल्कुल बदल गए है । अब खबर ये है कि अफगान सिखों पर दवाब बनाया जा रहा है कि अगर उन्हें अफगानिस्तान में रहना है तो वह या तो इस्लाम को स्वीकार कर लें या फिर देश छोड़ दें । दरअसल बड़ी संख्या में सिख काबुल में रहते हैं जबकि कुछ गजनी और नंगरहार प्रांतों में रहते हैं ।

5 अक्टूबर को 15 से 20 आतंकियों ने गुरुद्वारे (सिख मंदिर) में घुसकर गार्डों को बांध दिया । हमला काबुल के कार्त-ए-परवान जिले में हुआ । अफगानिस्तान में सिख अक्सर देश में इस तरह के हमलों और हिंसा का शिकार होते आए हैं । इससे पहले भी अफगानिस्तान में कई सिख विरोधी हिंसक हमले हुए ।

पिछले साल जून में कथित तौर पर 'आतंकवादियों' ने एक अफगान सिख नेता का अपहरण कर लिया गया था । सूत्रों ने मामले के बारे में अधिक जानकारी का खुलासा नहीं किया।

 मार्च 2019 में काबुल में एक और सिख व्यक्ति का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी । बाद में, अफगानिस्तान की पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था जबकि कंधार में एक अन्य अज्ञात बंदूकधारियों ने एक अन्य सिख व्यक्ति को गोली मार दी थी ।

सिख सदियों से अफगानिस्तान में रह रहे हैं, लेकिन दशकों से अफगान सरकार भी सिखों को पर्याप्त आवास प्रदान करने या उनके घरों को बहाल करने में विफल रही है, जिस पर 1990 के दशक के दौरान उनके शक्तिशाली पड़ोसियों या सरदारों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था । IFFRAS ने कहा कि 26 मार्च, 2020 को काबुल के एक गुरुद्वारे में तालिबान द्वारा हाल ही में सिखों के नरसंहार के बाद, अधिकांश अफगान सिख भारत के लिए रवाना हो रहे थे । 

इसके अलावा, संगठन की ओर से इस बात पर प्रकाश डाला गया कि चूंकि सिख समुदाय के लोग इस्लाम के सुन्नी संप्रदाय की मुख्यधारा के अंतर्गत नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें या तो जबरन सुन्नी मुसलमानों के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है। तालिबान की 'सरकार' कभी भी अफगान राज्य और समाज में विविधता को पनपने नहीं देगी। आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ इस्लामी संहिता के सबसे सख्त रूप के परिणामस्वरूप सिखों सहित अफगानिस्तान के सभी अल्पसंख्यक संप्रदायों का सफाया हो जाएगा या उन्हें इस्लाम अपनाना होगा ।  

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