पटनाः बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। जंगल का सबसे शानदार शिकारी इस बार खुद शिकार बन गया। दरअसल, जंगल का सबसे ताकतवर और खतरनाक शिकारी माने जाने वाला बाघ इस बार खुद एक मगरमच्छ का शिकार हो गया। यह जानकारी वन विभाग की ओर से बुधवार को दी गई है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला त्रिवेणी कैनाल इलाके का है, जहां एक बाघ रोज पानी पीने के लिए आता था। घटना वाले दिन भी वह उसी तरह पानी पीने के लिए कैनाल में उतरा, लेकिन इस बार पानी के अंदर उसका सामना एक छिपे हुए खतरे से हो गया। बताया जा रहा है कि जैसे ही बाघ पानी में गया, पहले से छिपे मगरमच्छ ने जंगल के शिकारी पर हमला कर दिया।
उसके अपने जबड़े में जकड़ लिया और गहरे पानी में ले गया। जब तक वन विभाग को बाघ और मगरमच्छ के बीच हुई भिड़ंत की जानकारी मिली, तब-तक सब खत्म हो चुका था। वन विभाग का कहना है कि घंटों की मशक्कत के बाद जो मिला, वो सिर्फ बाघ के क्षत-विक्षत अवशेष थे। बाघ के मृत शरीर की हालत इतनी खराब थी कि जिसने भी देखा वह सिहर गया।
बाघ के शरीर के चिथड़े और मांस के टुकड़े ही कलेक्ट किए जा सके। वन विभाग का कहना है कि बाघ पर मगरमच्छ का ये हमला वाकई चौंकाने वाला है। बता दें कि वीटीआर में बाघ के मौत की सिर्फ पहली घटना नहीं है। इसी साल तीन बाघ अपनी जान गंवा चुके हैं। वीटीआर में लगातार बाघों की मौत चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि बिहार के वीटीआर में बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है।
जिसकी वजह से ये अवैध शिकारियों और बाघों के अंगों की तस्करी करने वालों के निशाने पर भी है। वहीं, दूसरी ओर बाघों की बढ़ती संख्या के बीच जंगल में मनुष्यों की बढ़ती आबादी भी बाघों के लिए खतरा बन रही है। इसी साल जनवरी में एक बाघ की करंट लगने से मौत हुई थी। दूसरा हाल ही में एक किशोर बाघिन की रेस्क्यू के दौरान गिरने से जान गई और अब मगरमच्छ के हमले में बाघ की मौत हो गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय रिजर्व में टाइगर काउंटिंग चल रही है। ऐसे में लगातार हो रही मौतें वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर रही हैं। क्या टाइगर अब अपने ही घर में सुरक्षित नहीं? इस घटना ने जंगल और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारों का मानना है कि जंगल में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनका मूवमेंट भी बढ़ा है, जिससे वे नए और खतरनाक इलाकों में पहुंच रहे हैं। वहीं, मानव बस्तियों का बढ़ता दबाव और अवैध गतिविधियां भी खतरा पैदा कर रही हैं।