नागपुर: ‘राष्ट्रतेज... राष्ट्रप्राण... राष्ट्रध्वज!’ की भावना को साकार करते हुए नागपुर के ऐतिहासिक कस्तूरचंद पार्क की धरती पर देश की शान तिरंगे का भव्य लोकार्पण शनिवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों किया गया. लोकमत मीडिया समूह और नागपुर महानगरपालिका के संयुक्त प्रयास से तैयार 200 फुट ऊंचा यह राष्ट्रध्वज विदर्भ का सबसे ऊंचा राष्ट्रध्वज है. इसी के साथ विदर्भ के गौरव में एक और सम्मान जुड़ गया और नागपुर के इतिहास में यह क्षण स्वर्णाक्षरों में दर्ज हुआ. समारोह की अध्यक्षता लोकमत मीडिया समूह के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन और पूर्व सांसद डॉ. विजय दर्डा ने की.
इस अवसर पर महापौर नीता ठाकरे, विधायक विकास ठाकरे, विधायक अभिजीत वंजारी, विधायक संदीप जोशी, उप महापौर लीला हाथीबेड, महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रभारी जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटिल, सत्तापक्ष नेता नरेंद्र बोरकर, अतिरिक्त आयुक्त वसुमना पंत, वैष्णवी. बी, लोकनिर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संभाजी माने, अधीक्षक अभियंता जनार्दन भानुसे, कार्यकारी अभियंता लक्ष्मीकांत राऊलकर, उपविभागीय अभियंता अविनाश गुल्हाने, शाखा अभियंता नंदकिशोर ढेंगले व ठेकेदार अमित वाडीभस्मे व गौरव बजाज उपस्थित थे.
स्वाभिमान का प्रतीक तिरंगा: सीएम देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस समय अपने संबोधन में कहा कि युरोपिय देशों में हमें अक्सर ऊंचे -ऊंचे झंडे दिखाई देते थे. उस समय हमें भी लगता था कि हमारे देश का तिरंगा भी ऐसे ही विशाल रूप में लहराता हुआ नजर आए. लेकिन इसमें कुछ समस्याएं थी. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सार्वजनिक स्थानों पर 365 दिन लहराया जा सके ऐसे ऊंचे राष्ट्रध्वज लगाना आरंभ हुआ.
आज देश के प्रमुख शहरों में ऊंचे राष्ट्रध्वज दिखाई देते है. लेकिन नागपुर में यह संभव नहीं हो सका था. लोकमत मीडिया समूह ने इसके लिए पहल की और लंबे समय तक इसके लिए कोशिश जारी रखी. आज इसी वजह से शहर के बीचों बीच यह विशाल तिरंगा लहरा रहा है. नागपुर देश की जीरो माईल सिटी है.
इस स्मारक स्थल का डिजाइन इसी हिसाब से किया गया है. यह विशाल तिरंगा देखकर मेरा भी मन स्वाभिमान से भर आया है. इस परिसर में असामाजिक तत्वों का विचरण न हो, इसका खयाल पुलिस विभाग रखेगा, ऐसा भरोसा उन्होंने जताया.
युवाओं को मिलेगी प्रेरणा : डॉ. विजय दर्डा
लोकमत मीडिया ग्रुप के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व सांसद डॉ. विजय दर्डा ने कहा कि शहर में सबसे ऊंचे तिरंगे की संकल्पना वर्ष 2009 में की गई थी और लंबे प्रयासों के बाद यह सपना अब साकार हुआ है. उन्होंने कहा कि यह दिन नागपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अपने संबोधन में डॉ. दर्डा ने बताया कि वर्ष 2016 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों इस परियोजना का भूमिपूजन किया गया था,
लेकिन इसके बाद कई प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें सामने आईं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रध्वज, जो हमारी शान और हमारे प्राण का प्रतीक है, उसे स्थापित करने में भी इतनी कठिनाइयां आएंगी, यह पहली बार अनुभव हुआ. उन्होंने बताया कि जब तिरंगे की स्थापना में दिक्कतें आ रही थीं तब उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस बारे में चर्चा की.
मुख्यमंत्री ने तुरंत नागपुर के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को इस विषय पर ध्यान देने के निर्देश दिए. इसके बाद जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर ने इस परियोजना को गंभीरता से लिया और करीब 56 बार दिन-रात स्थल पर पहुंचकर कार्यों की समीक्षा की. डॉ. दर्डा ने बताया कि विश्व स्तर पर स्मारकों के लिए पहचाने जाने वाले आर्किटेक्ट शंतनू भल्ला ने इस स्मारक का प्रारंभिक डिजाइन तैयार किया था,
हालांकि बाद में उसमें कुछ बदलाव किए गए. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर, तत्कालीन मनपा आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों का विशेष आभार व्यक्त किया.
डॉ. दर्डा ने कहा कि यह परिसर आजादी के इतिहास से जुड़ा हेरिटेज क्षेत्र है, इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने विश्वास जताया कि यहां लहराता यह विशाल तिरंगा देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा और युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा.