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HIV की दवा कोरोनावायरस का तोड़ है?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 4, 2020 16:58 IST

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 कोरोना वायरस से निपटने के लिए वुहान में रिकार्ड दस दिन के भीतर में 1000 बिस्तरों वाला तैयार कर लिया और उसमें मरीजों का इलाज भी शुरू हो चुका है. बताया जाता है कि अभी तक इस बीमारी का इलाज नहीं है. लेकिन इस जानलेवा वायरस से इलाज के एक दवा का क्लीनिक परीक्षण भी शुरू हो चुका है. फिलहाल कोरोना वायरस के मरीजों को एंटीवायरल दिया जा रहा है और अन्य उपायों की मदद ली जा रही है. वैज्ञानिक इस वायरस के टीके की खोज की कोशिशों में लगे हुए हैं. हालांकि दावा किया जा रहा है कि एचआईवी के इलाज में काम आने वाली दवाओं को भी इस वायरस के मरीजों के इलाज के लिए टेस्ट किया जा रहा है. साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक टेस्ट की जाने वाली एंटीवायरल दवा रेमडेजिविर इबोला एवं सार्स जैसी बीमारियों में काम आती है और इसे अमेरिका की दवा कंपनी गिलिएड साइंसेंज ने तैयार किया है. चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने सोमवार को कहा था कि वुहान के कई अस्पतालों में दवा को टेस्ट किया जा रहा है. चाइनीज एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के जानकार झोंग नानशान ने कहा कि वर्तमान रिसर्च से पता चला है कि ये वायरस चमगादड़ से आता है लेकिन उसके इंसानों तक पहुंचने में किसी अन्य जीव का योगदान हैं या नहीं, यह जांच का विषय है.  झोंग नानशान ने सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ से कहा कि वैसे तो अब तक कोई प्रभावी उपचार नहीं है लेकिन इस वायरस की आनुवांशिक सामग्री को निशाना बनाने या कहें काम कर सकने वाली कम से कम सात दवाएं क्लीनिकल टेस्ट के विभिन्न दौर से गुजर रही हैं.अब तक चीन में  कोरोना वायरस के चलते 425 लोग जान गवां चुके हैं. मशहूर चीनी स्वास्थ्य विशेषज्ञ झोंग नानशान मानते हैं कि तेजी से चीन और दुनिया में फैल रहा कोरोना वायरस अगले 10 से 14 दिनों में अपने चरम पर होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले दो सप्ताह में इस वायरस के मामले बहुत तेजी से बढेंगे और फिर उसके बाद उसकी रफ्तार घट यानि असर कम होने लगेगा. चीन में कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए रिकार्ड दस दिन के अंदर 1000 बिस्तरों का अस्थायी अस्पताल बन कर तैयार है और बुधवार से उसके बगल में ही 1300 बिस्तरों वाला एक दूसरा अस्थायी अस्पताल काम करना शुरू कर देगा.मतलब चीन में अब कोरोना वायरस के इलाज के लिए 2300 बिस्तरों वाला अस्पताल मौजूद है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कोरोना वायरस के बारे में  गलत जानकारी फैलने से रोकने के उसने लिए गूगल के साथ हाथ मिलाया है.
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