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जानिए तुलसी विवाह का महत्व, मान्यताएं और विवाह की विधि

By प्रतीक्षा कुकरेती | Updated: November 24, 2020 10:12 IST

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कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के चार महीने बाद इसी दिन अपनी निंद्रा तोड़कर जागते हैं. इस दिन तुलसी विवाह कराने की परंपरा है और तुलसी के पौधे का श्रृंगार दुल्हन की तरह किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि तुलसी विवाह करवाने से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. हिन्दू धर्म के अनुसार तुलसी विवाह करवाने से पुण्यों की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की कन्याएं नहीं होती हैं और वह कन्या दान का पुण्य कमाना चाहते हैं उन्हें देवी तुलसी का विवाह कराने से कन्या दान का पुण्य प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में तुलसी विवाह के बाद ही शादियों के मुहूर्त निकाले जाते हैं. इतना ही नहीं मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और अटूटता आती है. इस बार तुलसी विवाह 25 नवम्बर को किया जायेगा.
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