जैसे आम लोग अपने काम के लिए बैंकों से लोन लेते है, उसी तरह बैंक अपने काम के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेते हैं। इस लोन बैंक जिस रेट से ब्याज चुकाते हैं उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि अगर रेपो रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को महंगा लोन मिलेगा और वो अपने ग्राहकों को ज्यादा रेट पर लोन देंगे। वहीं अगर रेपो रेट कम होगो तो कों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा और वो भी ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। Read More
एलआईसीएचएफ ने बयान में कहा कि उसने कर्ज पर ब्याज दर से संबंधित ‘एलआईसी हाउसिंग मुख्य ऋण दर (एलएचपीएलआर) में 0.35 प्रतिशत की वृद्धि की है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक वाई विश्वानाथ गौड़ा ने कहा, ‘‘दरों में वृद्धि बाजार की परिस्थितियों क ...
मई से अब तक एचडीएफसी अपनी ऋण दरों में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है। एचडीएफसी ने कहा कि 8.65 प्रतिशत की नई दर सिर्फ उन ग्राहकों के लिए ही होगी जिनका ‘क्रेडिट स्कोर’ 800 या उससे अधिक होगा। ...
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में किये गये निर्णय की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा, ‘‘मौजूदा आर्थिक स्थिति पर विचार करते हुए एमपीसी ने नीतिगत दर रेपो 0.35 प्रतिशत ...
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच इसे उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है। ...
खुदरा मुद्रास्फीति में इजाफा मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की वजह से हुआ है। सितंबर में खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति दर 8.6 फीसदी रही। ...
30 सितंबर 2022 को रेपो रेट में की गई 0.50 फीसदी की बढ़ोत्तरी के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.90 फीसदी हो गया है। रेपो रेट दरअसल ब्याज की वह दर होती है जिसमें रिजर्व बैंक, बैकों को कर्ज देती है। ...
जानकारों ने सुझाव दिया है कि आने वाले महीनों में आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी जारी रख सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) ने भी अपनी दरों में बढ़ोतरी पर इसी तरह का रुख अपनाया है। ...