चन्द्रग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते हैं जब चंद्रमा पृथ्वी से ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में चला जाता है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक ही क्रम में लगभग सीधी रेखा में आ जाते हैं। विज्ञान के इतर हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र की चन्द्रग्रहण की अपनी एक परिभाषा है जिसके अनुसार चंद्रमा के आगे राहु-केतु नाम की खगोलीय बिंदु बन जाती है। राहु-केतु ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक छाया ग्रह हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति विशेष पर बुरा असर पड़ता है इसलिए शास्त्रों में ग्रहण से बचने के लिए विभिन्न उपाय दर्ज हैं। Read More
शरद पूर्णिमा जिसे अश्विन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस वर्ष, यह 28 अक्टूबर को पड़ रहा है और चंद्र ग्रहण के साथ मेल खाता है। इस दौरान मंत्रों का जाप करने, भोग लगाने, ब्रह्मचर्य बनाए रखने और गंगा नदी में ...
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण को एक अशुभ अवधि के रूप में देखा जाता है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन लगता है। जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर लगता है। ...
ग्रहण का प्रारम्भ दोपहर 02:38:05 पर मध्य की स्थिति दोपहर 04:29:1 एवं मोक्ष सांय 06:19:02 पर होगा। मध्य की स्थिति में चन्द्रमा का 100 प्रतिशत भाग पृथ्वी के छाया क्षेत्र में हो जाएगा। ...
Chandra Grahan 2022: दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई एवं बेंगलुरु में ग्रहण की पूर्णावस्था के अंत के उपरांत चंद्रोदय होगा एवं उस समय आंशिक ग्रहण चल रहा होगा। ...