उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों में बसा भगवान शिव का धाम केदारनाथ को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में 11वां माना जाता है। मंदिर कम से कम 1200 साल पुराना माना जाता है। खास बात यह है कि इस मंदिर के निर्माण के लिए प्रयोग किया गया पत्थर वहां उपलब्ध नहीं है। ...
मंदिर तक सीधे सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता है और गौरीकुंड से 22 किलोमीटर (14 मील) की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए टट्टू, खच्चर और मंचन की सेवा उपलब्ध है। ...
रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि हादसा सुबह करीब साढ़े सात बजे गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर गौरीकुंड से तीन किलोमीटर आगे चीड़वासा के पास हुआ, जहां पहाड़ी से अचानक आए मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में वहां से गुजर ...
केदारनाथ मंदिर से जुड़े पुजारी और प्रबंधन इस बात के विरोध में हैं कि देश में अन्य किसी जगह केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बने। अब उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल ने एक कानून लाने का फैसला किया है जो संगठनों या ट्रस्टों को चारधाम मंदिरों के नामों का उपयोग करन ...
मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने गर्भगृह से सोने की चोरी के आरोपों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए आरोप लगाने वालों से विवाद खड़ा करने की बजाय सक्षम स्तर पर मामले की जांच की मांग कराने का अनुरोध किया। ...
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राष्ट्रीय राजधानी में केदारनाथ मंदिर बनाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रतीकात्मक केदारनाथ नहीं हो सकता। ...
घटना के एक वीडियो में हेलीकाप्टर को मंदिर के पास उतरने से पहले हेलीपैड से कुछ मीटर ऊपर चक्कर लगाते हुए देखा जा सकता है। लैंडिग की कोशिश कर रहा हेलीकॉप्टर अचानक से नियंत्रण खो दिया। ...