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WhatsApp पर फेक न्यूज से निपटने के लिए आया नया फीचर, ऐसे जानें खबर फर्जी है या नहीं

By जोयिता भट्टाचार्या | Updated: April 3, 2019 12:46 IST

चुनावों में फर्जी खबरों के रोकने के लिए WhatsApp ने 'Checkpoint Tipline' को लॉन्च किया है। फेक और रियल की पहचान के लिए फैक्ट चेकर सर्विस को लॉन्च किया गया है।

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ठळक मुद्देचुनावों में फर्जी खबरों के रोकने के लिए WhatsApp ने 'Checkpoint Tipline' को लॉन्च किया हैफेक और रियल की पहचान के लिए फैक्ट चेकर सर्विस को लॉन्च किया गया हैयह सर्विस इंग्लिश, हिंदी, बंगाली, मलयालम और तेलगु भाषाएं सपोर्ट करती है

देश में आम चुनाव को देखते हुए मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सऐप ने एक बड़ा कदम उठाया है। चुनावों में फर्जी खबरों के रोकने के लिए WhatsApp ने 'Checkpoint Tipline' को लॉन्च किया है। फेक और रियल की पहचान के लिए फैक्ट चेकर सर्विस को लॉन्च किया गया है। इसके जरिए लोग उन्हें मिलने वाली जानकारी की प्रमाणिकता चेक सकते हैं।

इस सिस्टम से टेक्स्ट, इमेज और वीडियो फॉर्मेट्स का वेरिफिकेशन किया जा सकेगा। यह सर्विस इंग्लिश, हिंदी, बंगाली, मलयालम और तेलगु भाषाएं सपोर्ट करती है।

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WhatsApp ने की PROTO के साथ पार्टनरशिप

व्हाट्सऐप पर मालिकाना हक रखने वाली कंपनी फेसबुक ने एक बयान में कहा कि इस सेवा को भारत के एक मीडिया कौशल स्टार्टअप ‘प्रोटो’ ने पेश किया है। यह टिपलाइन गलत जानकारियों एवं अफवाहों का डाटाबेस तैयार करने में मदद करेगी। इससे चुनाव के दौरान ‘चेकपॉइंट’ के लिए इन जानकारियों का अध्ययन किया जा सकेगा।

चेकपॉइंट एक शोध परियोजना के तौर पर चालू की गई है जिसमें व्हाट्सऐप की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।

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WhatsApp पर आई खबरों का ऐसे करें फैक्ट चेक

अगर आपको किसी खबर के फर्जी होने को लेकर कोई शक है तो उससे जुड़े खबर लिंक को CheakPoint Tipline (9643000888) पर मैसेज कर सकते हैं। इसके लिए आपको यह नंबर सेव करना होगा। इसके बाद संदेहपूर्ण लिंक, फोटो और टेक्स्ट को इस नंबर पर सेंड करना होगा।

एक बार जब कोई यूजर टिपलाइन को यह खबर देगा तब प्रोटो अपने प्रमाणन केंद्र पर जानकारी के सही या गलत होने की पुष्टि कर उपयोक्ता को सूचित कर देगा। इस पुष्टि से यूजर को पता चल जाएगा कि उसे मिला मैसेज सही, गलत, भ्रामक या विवादित में से क्या है।

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इन भाषाओं की खबर की जांच कर पाएंगे

WhatsApp की टीम चार भाषाओं हिंदी, तेलुगु, बंगाली और मलयाली के कंटेंट की जांच करने में सक्षम होगा। भारत में पिछले साल मॉब लिंचिंग, अफवाह की कई खबरों को फैलन में व्हाट्सऐप का उपयोग किया गया है। पिछले साल व्हाट्सऐप ने 5 लोगों से ज्यादा को मैसेज भेजने पर रोक लगाई थी।

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