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Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर भद्रा का साया, जानें पूजा का शुभ, व्रत पारण का समय एवं व्रत विधि

By रुस्तम राणा | Updated: June 20, 2025 15:52 IST

इस साल योगिनी एकादशी व्रत 21 जून, शनिवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून सुबह 7 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 22 जून को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी।

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Yogini Ekadashi 2025: आषाढ़ माह कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत विधि-विधान के साथ करने से सारे पाप मिट जाते हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि योगिनी एकादशी व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर का फल प्राप्त होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार योगिनी एकादशी पर भद्रा का साया रहेगा। 

योगिनी एकादशी कब है?

इस साल योगिनी एकादशी व्रत 21 जून, शनिवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून सुबह 7 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 22 जून को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि पड़ने के कारण यह व्रत 21 जून दिन शनिवार को रखा जाएगा। 

योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त एवं व्रत पारण का समय

योगिनी एकादशी की पूजा के लिए उत्तम मुहूर्त सुबह 4 बजकर 4 मिनट से सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से दोपहर 2 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जबकि पारण (व्रत तोड़ने का) समय अगले दिन 22 जून को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट से शाम 04 बजकर 34 मिनट तक रहने वाला है। 

योगिनी एकादशी भद्रा का साया

हिन्दू पंचांग के अनुसार, एकादशी पर भद्रा का साया सुबह 5 बजकर 24 मिनट से सुबह 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।

योगिनी एकादशी की व्रत विधि

सुबह तड़के उठना चाहिए स्नान आदि कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु जी को पंचामृत से स्नान करवाना चाहिए।  मंदिर की अच्छी तरह से सफाई करें और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।विष्णु जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं। उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाएं। भोग में तुलसी को अवश्य शामिल करें।शाम को तुलसी की पूजा करें। रात्रि में भगवान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।सुबह व्रत पारण मुहूर्त में व्रत खोलें।अंत में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर विदा करें। 

योगिनी एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में अलकापुरी नगर में राजा कुबेर के यहां हेम नामक एक माली रहता था। उसका कार्य रोजाना भगवान शंकर के पूजन के लिए मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन उसे अपनी पत्नी के साथ स्वछन्द विहार करने के कारण फूल लाने में बहुत देर हो गई। वह दरबार में विलंब से पहुंचा। इस बात से क्रोधित होकर कुबेर ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से हेम माली इधर-उधर भटकता रहा और एक दिन देवयोग से मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने अपने योग बल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया। तब उन्होंने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

टॅग्स :एकादशीभगवान विष्णुहिंदू त्योहार
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