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Chhath Puja 2024: डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का पहला चरण हुआ समाप्त, शुक्रवार को दिया जाएगा उगते हुए सूर्य को अर्घ्य

By एस पी सिन्हा | Updated: November 7, 2024 17:44 IST

गुरुवार शाम को पटना और राज्य के अन्य हिस्सों में पवित्र गंगा नदी और अन्य जल निकायों के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ पूजा-अर्चना किया। 

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पटना: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन गुरुवार को पूरे राज्य में श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पहला चरण को पार कर लिया। शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा, जो चार दिवसीय पर्व के समापन का प्रतीक होगा। गुरुवार शाम को पटना और राज्य के अन्य हिस्सों में पवित्र गंगा नदी और अन्य जल निकायों के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ पूजा-अर्चना किया। 

वहीं, पटना के एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी डूबते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। दरअसल, मुख्यमंत्री आवास में नीतीश कुमार के परिवार के सदस्य छठ पूजा कर रहे हैं। ऐसे में पटना के गंगा घाटों का जायजा लेने से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। 

अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद मुख्यमंत्री स्टीमर से पटना के विभिन्न छठ घाटों का जायजा लेने निकल गये। पटना के विभिन्न छठ घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा छठ पर्व में शामिल होने के लिए पटना पहुंचे। जहां एयरपोर्ट पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. दिलीप जायसवाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, पूर्व सांसद राम कृपाल यादव, विधान पार्षद नवल किशोर यादव सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। 

इसके बाद जेपी नड्डा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ स्टीमर पर सवार होकर गंगा घाट में अर्घ्य देने वाले श्रद्धालुओं का दर्शन किया। बता दें कि चार दिवसीय उत्सव पांच नवंबर को 'नहाय खाय' अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ था। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और दिवाली के छह दिन बाद शुरू होता है। पहले दिन श्रद्धालु छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करते हैं तथा अपने परिवार तथा बच्चों की समृद्धि के लिए उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। 

अगले दिन श्रद्धालु दिन भर का उपवास रखते हैं, जो शाम को सूर्य और चंद्रमा की प्रार्थना के बाद समाप्त होता है। तीसरे दिन को 'पहला अर्घ्य' कहा जाता है। श्रद्धालु नदी के किनारे जाकर सूर्य देव को 'प्रसाद' और 'अर्घ्य' चढ़ाते हैं। इसके बाद उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व आठ नवंबर को सुबह समाप्त हो जाएगा।

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