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Navratri 2019: मां दुर्गा के नौ रूप क्या हैं, क्या है कथा और इन 9 दिनों का क्या है महत्व, जानें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 12, 2019 13:33 IST

Navratri 2019: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस बार 29 सितंबर से हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। आईए, जानते हैं कि मां दुर्गा के ये 9 स्वरूप कौन-कौन से हैं और क्या है इनकी महिमा....

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ठळक मुद्देNavratri 2019: नवरात्रि की शुरुआत इस बार 29 सितंबर सेनवरात्रि के दौरान शक्ति की देवी मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की होती है पूजा

Navratri 2019: अश्विन मास में पड़ने वाले शारदीय नवरात्रि या दुर्गा पूजा (Durga Puja) की शुरुआत इस बार 29 सितंबर से हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। इस त्योहार के दौरान 9 दिनों तक शक्ति की देवी मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में बहुत धूमधाम से मनाये जाने वाले इस त्योहार के आखिरी दिन विजयादशमी मनाया जाता है। नवरात्रि से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा मां दुर्गा के असुर महिषासुर का वध करना है। नवरात्रि के दौरान हर दिन देवी के एक स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए, हम आपको बताते हैं नवरात्रि में किन 9 देवियों की पूजा की जाती है और क्या है इनका महत्व...

1. नवरात्रि का पहला दिन- शैलपुत्री (Shailputri): मां दुर्गा का यह पहला रूप है। शैलपुत्री पर्वतों के राजा हिमालय की पुत्री हैं। राजा हिमालय ने कई तपस्या की जिसके फल स्वरुप माता दुर्गा उनकी पुत्री के रूप में पृथ्वी पर उतरी। इसलिए इन्हें शैलपुत्री (पर्वत की बेटी) कहा जाता है। इनका वाहन बैल है और उनके दायें हांथ में त्रिशूल जबकि बाएं हाथ में कमल का फूल होता है। 

2. ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini): माता दुर्गा का यह दूसरा रूप है। इस रूप में वह अपने दायें हाथ में एक माला पकड़ी रहती है और बाएं हाथ में एक कमंडल रखती हैं। नारद मुनि की सलाह देने पर माता ब्रह्मचारिणी ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तपस्या किया। प्रसन्नता और आनंद की देवी के पूजन को मोक्ष की राह के तौर पर भी बताया गया है। मान्यता है कि माता शक्ति ने मुक्ति प्राप्त करने के लिए ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त किया और इसी कारण उनको ब्रह्मचारिणी के नाम से पूजा जाता है। 

3. चंद्रघंटा (Chandraganta): माता दुर्गा का यह तीसरा रूप है। चंद्र यानी कि चंद्रमा। यह शांति प्रदान करने वाली मां का रूप है। मां की अराधना करने से सुख-शांति मिलती है। मां चंद्रघंटा के दस हाथ हैं और कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र जैसे खड्ग, बाण, त्रिशूल, पद्म फूल उनके हाथों में होते हैं। 

4. कुष्मुंडा (KushMunda): नवरात्रि के चौथे स्वरूप के तौर पर देवी कुष्मुंडा की पूजा होती है। माता दुर्गा का यह चौथा स्वरूप मातृत्व को समर्पित है। मान्यता है कि जब पृथ्वी पर कुछ नहीं था और अंधकार ही अंधकार था तब माता स्कंदमाता ने ही सृष्टि को जन्म दिया। माता ने ऊर्जा का सृजन भी किया। माता कुष्मांडा के आठ हाथ होते हैं इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनका वाहन सिंह है। माता को शुद्धता की देवी कहा गया है, उनकी पूजा से सभी रोग और कष्ट दूर होते हैं।

5. स्कंदमाता (Skand Mata): स्कंददमाता देवी का पांचवां रूप है। ये स्कंद यानी कार्तिक की जनक भी हैं जिन्हें देवताओं ने असुरों के खिलाफ युद्ध में अपना नेतृत्व सौंपा था। तस्वीरों में कार्तिक को माता पार्वती अपने गोद में बैठाये नजर आती हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी 4 भुजाएं हैं, ऊपर के दाएं हाथ में माता कमल का फूल पकड़ी रहती है और नीचे के एक हाथ से मां वरदान देती हैं। वहीं, दूसरे यानी बाएं हाथ से माता कार्तिक को पकड़ी रखती हैं।

 6. कात्यायनी (Katyayani): मां दुर्गा के इस रूप का जन्म महर्षि कात्यायन से हुआ था। कथा के अनुसार एक दिन महर्षि कात्यायन महिषासुर के अंत के लिए कठोर तपस्या कर रहे थे। उसी दौरान भगवान ब्रह्मा, विष्णु, और महेश एक साथ उनके सामने प्रकट हुए। तीनों ने मिलकर अपनी शक्ति से माता दुर्गा को प्रकट किया। यह आश्विन महीने के 14वें दिन पूर्ण रात्रि के समय हुआ। इसलिए माता दुर्गा का एक नाम मां कात्यायनी है। माता कात्यायनी को शुद्धता की देवी माना जाता है। माता कात्यायनी के चार हाथ हैं। उनके उपरी दाहिने हाथ में वे ऐसी मुद्रा प्रदर्शित करती हैं जो डर से मुक्ति देता है। उनके निचले दाहिने हाथ में वह आशीर्वाद मुद्रा, उपरी बाएं हाथ में वह तलवार है और निचले बाएं हाथ में कमल का फूल रखती है।

7. कालरात्रि (Kalratri): मां कालरात्रि को दुर्गा का सातवां रूप माना जाता है। उनका नाम कालरात्रि इसलिए है क्योंकि वह काल का भी विनाश हैं। उनमें इतनी क्षमता है कि वह सब कुछ विनाश कर सकती हैं। माता का रंग काला होता है। उनके बाल बिखरे हुए होते हैं और शरीर अग्नि के सामान तेज होता है। माता कालरात्रि के चार हाथ हैं। उनके ऊपर का दायां हाथ आशीर्वाद देती मुद्रा में है और निचले दाएं हाथ से मां निडरता प्रदान करती है। उनके ऊपर बाएं हाथ में कटार और निचले बाएं हाथ में वज्र है। 

8. महागौरी (Maha Gauri): मां दुर्गा का ये 8वाां स्वरूप है। ये माता का एक शांत स्वरूप है। मान्यता है कि शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या से देवी पार्वती का रंग सांवला हो गया था। बाद में शिवजी जब प्रसन्न हुए तो उन्होंने गंगा के पानी को माता पार्वती के ऊपर डाल कर उन्हें गोरा रंग दिया। इसके बाद से माता पार्वती को महागौरी के नाम से भी पूजा जाने लगा। उनका वाहन बैल है। महागौरी के चार हाथ हैं। उनके ऊपरी दाहिने हाथ से मां आशीर्वाद देती है, जबकि निचले दाएं हाथ में माता त्रिशूल रखती है। ऐसे ही माता के ऊपरी बाएं हाथ में डमरू होता है और निचले हाथ से वह वरदान देती हैं। 

9. सिद्धिदात्री (Siddhidaatri): मां दुर्गा के 9वें रूप सिद्धिदात्री को सिद्धि प्रदान करने की माता कहा जाता है। मान्यता है कि माता सिद्धिदात्री की वजह से ही  शिवजी को अर्धनारिश्वार का रूप मिला। उनका वाहन सिंह है और उनका आसन कमल का फूल है। सिद्धिदात्री के चार हाथ हैं। माता ने ऊपर के दाहिने हाथ में गदा और निचले हाथ में चक्र थाम रखा है। ऐसे ही माता अपने ऊपरी बाएं हाथ में एक कमल का फूल और निचले बाएं हाथ में एक शंख रखती हैं। 

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