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Karwa Chauth 2021 Date: 24 या 25 अक्टूबर, कब है करवा चौथ? जानिए सही तारीख, व्रत विधि और चंद्रोदय का समय

By रुस्तम राणा | Updated: October 5, 2021 10:25 IST

करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए निर्जल व्रत का पालन करती हैं और चंद्र देव के दर्शन करने के बाद ही जल ग्रहण कर इस व्रत का पारण किया जाता है।

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ठळक मुद्देहिन्दू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ के दिन चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र में उदय होंगे।मान्यता है कि, इस नक्षत्र में व्रत रखना बेहद शुभ होता है।इस नक्षत्र में चंद्र देव के दर्शन से मनवांछित फल प्राप्त होता है।

करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। महिलाओं को इस व्रत का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए निर्जल व्रत का पालन करती हैं और चंद्र देव के दर्शन करने के बाद ही जल ग्रहण कर इस व्रत का पारण किया जाता है। सरगी, सोलह शृंगार, चांद निकलने पर छलनी से पति के दर्शन इस व्रत की महत्वपूर्ण चीजें हैं। हर साल करवा चौथ व्रत कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल 24-25 अक्टूबर को यह तिथि पड़ रही है। ऐसी स्थिति में यह सवाल बनता है कि करवा चौथ व्रत कब रखा जाएगा। दरअसल इस साल करवा चौथ व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा। 

इस बार बन रहा है खास संयोग

इस साल करवा चौथ पर शुभ संयोग बन रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ के दिन चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र में उदय होंगे। मान्यता है कि, इस नक्षत्र में व्रत रखना बेहद शुभ होता है। इस नक्षत्र में चंद्र देव के दर्शन से मनवांछित फल प्राप्त होता है।

करवा चौथ व्रत मुहूर्त 

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 24 अक्टूबर, रविवार को सुबह 03 बजकर 01 मिनट परचतुर्थी तिथि समाप्त: 25 अक्टूबर 2021 को सुबह 05 बजकर 43 मिनट परपूजा मुहूर्त: 24 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 43 मिनट से 06 बजकर 59 मिनट तक रहेगाचंद्रोदय: 24 अक्टूबर को चांद रात 08 बजकर 07 मिनट पर

करवा चौथ व्रत विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की परंपरा के अनुसार सरगी आदि ग्रहण करें। स्नानादि करने के पश्चात निर्जल व्रत का संकल्प करें। शाम के समय तुलसी के पास बैठकर दीपक प्रज्वलित कर करवाचौथ की कथा सुनें। चंद्रोदय से पहले ही एक थाली में धूप-दीप, रोली, पुष्प, फल, मिष्ठान आदि रख लें। एक लोटे में अर्घ्य देने के लिए जल भर लें। मिट्टी के बने करवा में चावल या फिर चिउड़ा आदि भरकर उसमें दक्षिणा के रुप में कुछ पैसे रख दें। एक थाली में श्रृंगार का सामान भी रख लें। चंद्र दर्शन कर पूजन आरंभ करें। सभी देवी-देवताओं का तिलक करके फल-फूल मिष्ठान आदि अर्पित करें। श्रृंगार के सभी सामान को भी पूजा में रखें और टीका करें। अब चंद्र देव को जल का अर्घ्य दें। छलनी में दीप जलाकर चंद्र दर्शन करें, अब छलनी से अपने पति के दर्शन करें। इसके बाद पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें। अंत में  श्रृंगार की सामाग्री और करवा को अपनी सास या फिर किसी सुहागिन स्त्री को दें।

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