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Jagannath Rath Yatra 2024 : रथ यात्रा से 15 दिन पहले बीमार क्यों पड़ जाते हैं भगवान जगन्नाथ? जानें क्या है मान्यता

By मनाली रस्तोगी | Updated: July 1, 2024 08:40 IST

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ठळक मुद्देहर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।भक्त रथ यात्रा में हर साल हजारों की तादाद में शामिल होते हैं।भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा इस यात्रा में तीन भव्य रथों पर विराजमान होते हैं।

Jagannath Rath Yatra 2024: हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। भक्त रथ यात्रा में हर साल हजारों की तादाद में शामिल होते हैं।

भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा इस यात्रा में तीन भव्य रथों पर विराजमान होते हैं। य​ह यात्रा इस साल 7 जुलाई को सुबह 04 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 08 जुलाई को सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर होगा।

माना जाता है कि इस यात्रा के शुरू होने से 15 दिन पहले जगत के पालनहार भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। ज्योतिषी आचार्य पंडित योगेश चौरे ने न्यूज18 को बताया कि ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे की पौराणिक कहानी क्या। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ का माधव नाम का एक परम भक्त था। एक दिन जब वे बीमार पड़ गये तो स्वयं भगवान जगन्नाथ उनकी सेवा करने आये।

जब भक्त ने उनसे पूछा "भगवान, आप मेरी सेवा क्यों कर रहे हैं जब आप मुझे भी ठीक कर सकते हैं।" भगवान ने कहा कि नियति को सहना ही पड़ता है चाहे कुछ भी हो। यदि अब इसे कटवाओगे तो अगले जन्म में कष्ट भोगना पड़ेगा। 

भगवान जगन्नाथ माधव से कहते हैं कि जो दर्द उन्हें हो रहा है, उसे 15 दिन और सहना होगा। वह माधव के दर्द को सहने की पेशकश करता है और समझाता है कि अगर वह इस दर्द को सहन करेगा, तो माधव का भाग्य नष्ट हो जाएगा। ऐसा माना जाता है कि तब से भगवान जगन्नाथ साल में एक बार 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते हैं। 

दूसरी मान्यता यह है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर जाते हैं। वे अपनी मौसी के घर पर 7 दिनों तक रहते हैं, जिसके बाद वे वापस लौट आते हैं। यह परंपरा प्रतिवर्ष रथयात्रा के रूप में निभाई जाती है। 

एक अन्य पौराणिक कहानी बताती है कि एक बार भगवान कृष्ण, उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलराम अपनी मौसी के घर गए। वहां नहाने के बाद तीनों भाई-बहन बीमार पड़ गये। उनके इलाज के लिए एक वैद्य को बुलाया गया और वे 15 दिनों के बाद ठीक हो गए। ठीक होने के बाद तीनों भाई-बहन शहर घूमने निकले। तब से हर साल यह परंपरा निभाई जाती है।

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