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Jagannath Rath Yatra 2019: सोने के झाड़ू से होती है रास्ते की सफाई, जानिए पुरी की पवित्र रथ यात्रा के बारे में सबकुछ

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 2, 2019 15:22 IST

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं। रथ का निर्माण हर साल वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को विधिवत तौर पर शुरू होता है।

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ठळक मुद्देआषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को शुरू होती है रथ यात्राप्रभु जगन्नाथ बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा सहित नगर भ्रमण पर इस दिन निकलते हैं

उड़ीसा के पुरी की पवित्र जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल 4 जुलाई को है। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को हर साल होने वाले इस विशेष आयोजन का हिंदू मान्यताओं में विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के रथ खींचने से पुण्य मिलता है। तमाम भक्तों के बीच इसकी होड़ भी देखने को मिलती है। ऐसा कहते हैं कि जगन्नाथ रथयात्रा में रथ को खींचने से जीवात्मा को मुक्ति मिल जाती है। 

जगन्नाथ रथ यात्रा 2019: सोने की झाड़ू से होती है रास्ते की सफाई

इस रथ यात्रा के दौरान भगवान श्री जगन्नाथ को सपरिवार विशाल रथ में बैठा कर भ्रमण करवाया जाता है। यह रथ यात्रा राजा इंद्रधुम्न की रानी गुंडीचा के महल तक होती है। भक्तगण उपवास रखकर रथ खींचते हैं। खास बात ये है कि रथ यात्रा के इस मार्ग की सफाई सोने की झाड़ू से की जाती है।

पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने पुरी में पुरुषोतम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था। रथयात्रा के पीछे पौराणिक मत यह भी है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन जगन्नाथ पुरी का जन्मदिन होता है। इसके बाद प्रभु जगन्नाथ को बड़े भाई बलराम जी तथा बहन सुभद्रा के साथ मंदिर के पास बने स्नान मंडप में ले जाया जाता है।

उन्हें यहां 108 कलशों से शाही स्नान कराया जाता है। मान्यता यह है कि इस स्नान के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं उन्हें ज्वर आता है। 15 दिनों तक उन्हें एक विशेष कक्ष में रखा जाता है और कोई भक्त उनके दर्शन नहीं कर पाता। इस दौरान मंदिर के प्रमुख सेवक और वैद्य उनका इलाज करते हैं।

15 दिन के बाद भगवान स्वस्थ होकर अपने कक्ष से बाहर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को वे भ्रमण और भक्तों से मिलने के लिए नगर में निकलते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा: जानिए रथ यात्रा से जुड़ी खास बातें

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं। रथ का निर्माण हर साल वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को विधिवत तौर पर शुरू होता है। इसमें 832 लकड़ी के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। किसकी मूर्ति कितनी बड़ी होगी, यह भी तय होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ जहां 16 मीटर होता है वहीं, बलराम जी का रथ 14 मीटर ऊंचा होता है। सुभद्रा जी का रथ 13 मीटर ऊंचा होता है।

रथयात्रा में बलभद्र का रथ 'तालध्वज' सबसे आगे होता है। बीच में सुभद्रा का रथ 'पद्म रथ' होता है। वहीं, सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का 'नंदी घोष' या 'गरुड़ध्वज' रथ रहता है।

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