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होली में क्यों पीते हैं भांग, कहां से शुरू हुई ये प्रथा जानिए

By धीरज पाल | Updated: March 2, 2018 07:49 IST

भांग का पौधा 3-8 फीट ऊंचाई का होता है। इसके पत्ते को सुखाकर भांग तैयार किया जाता है।

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आज (दो मार्च) होली है। जैसे-जैसे होली का त्योहार नजदीक आता है, वैसे-वैसे लोगों में उमंग और उत्साह की लहर दौड़ जाती है। लोग होली के कई दिन पहले से ही होली मनाने की योजना बनाने लगते हैं। लोगों के बीच होली का बुखार सिर चढ़कर बोलने लगता है। इस दिन रंग के साथ लोगों पर भांग का खुमार भी चढ़ते हुए देखा जा सकता है।

होली में भांग का महत्व

होली में भांग का अपना अलग महत्व है। इस दिन लोगों के घर भांग से कई किस्म की चीजों का सेवन करते हैं। इसमें भांग की गोली, भांग से बने पकवान, भांग की लस्सी और ठंडाई आदि का सेवन करते हैं। माना जाता है कि बिना भांग की होली अधूरी मानी जाती है। 

आयुर्वेदिक औषधि है भांग

जैसा कि भांग एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाने वाली जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल प्राचीन काल से चला आ रहा है। भांग के पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल नशे व स्मोक के रूप में भी करते हैं। लेकिन भांग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होली के त्योहार में होता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सोचा कि होली के वक्त ही भांग की डिमांड इतनी बढ़ जाती है और होली से भांग का क्या लेना देना है या इसकी होली में क्या महत्वता है।

जानकारी के लिए बता दें कि भांग का पौधा 3-8 फीट ऊंचाई का होता है। इसके पत्ते को सुखाकर भांग तैयार किया जाता है। होली के इस मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि होली में भांग क्या महत्व है। कहा जाता है कि भांग का सेवन भगवान शिव से जुड़ा है।

यह भी पढ़ें: भांग के सेवन से होते हैं ये 8 बड़े नुकसान, भांग का नशा उतारने के 4 असरदार उपाय

भारतीय परंपरा में भांग का महत्व

जैसा की देश में भांग की परंपरा और रीति-रिवाज का चलन प्राचीन काल से चली आ रही है। देश के कुछ ग्रामीण अंचल में इसका इस्तेमाल औषधीय गुणों के रूप में करते हैं। माना जाता है कि भांग के सेवन मात्र से बुखार को ठीक करने, सूरज की रोशनी से बचाने, कफ को साफ करने, पाचन में सहायता और भूख के इलाज जैसी समस्याओं में किया जा सकता है। साथ ही साथ इसका इस्तेमाल चिंता दूर करने के रूप में किया जाता है और यह ध्यान को बढ़ाकर शरीर को सतर्कता प्रदान करती है।

शिव करते थे भांग का सेवन

माना जाता है कि भगवान शिव ने भांग का सेवन अपनी दिव्य शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तेमाल किया था और पवित्र हिंदू पाठ अथर्ववेद में भांग को धरती पर 5 सबसे पवित्र पौधों में से एक माना गया है।  वेदों के कुछ वैदिक अनुष्ठानों मैं दुश्मनों और बुरी ताकतों से उबरने के लिए अनुष्ठान यज्ञ में भांग को जला दिया जाता था क्योंकि वेद भांग को “खुशी का स्रोत” “आनंद देने वाला” और “मुक्तिदाता” के रूप में मानते थे । इसलिए भांग का इस्तेमाल होली में किया जाता है। इसके इस्तेमाल से लोग सारे गम, दुख भुलाकर आनंद प्रदान के लिए करते हैं।

शिव पूजन में भांग का महत्व

भगवान शिव और भांग की इस कथा को आधार मानते हुए शिव भक्तों में ऐसी मान्यता प्रचलित है कि शिवजी के प्रसाद कहे जाने वाले भांग का सेवन करने से उनका शरीर भी पवित्र हो जाता है। इसलिए महाशिवरात्रि हो या श्रावण का महीना, शिव भक्त भांग का सेवन एक बार अवश्य करते हैं। 

भगवान शिव की पूजा करते समय इस्तेमाल होने वाली तमाम सामग्रियों में भांग भी एक सामग्री है। इसके बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। कहते हैं इसे पूजा में अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं। भांग के अलावा धतूरा और बेला पत्र भी चढ़ाना अनिवार्य माना जाता है।

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इन चीजों में होता है भांग का इस्तेमाल 

होली के मौके पर भांग का इस्तेमाल भांग की लस्सी में किया ज्याता है। भांग के हरे पत्तियों को पीसकर दही और मट्ठे के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। इसका मिश्रण बनने तक इसे हाथों से अच्छी तरह से मथा जाता है ताकि स्वाद व ताजा बना रहे। भांग का इस्तेमाल पकौड़ों में भी किया जाता है। भांग की लस्सी के अलावा इसकी ठंडाई भी बनाई जाती है। भांग की ठंडाई में दुध,चीनी, पानी, खरबूजे की बीज, इलायची, भांग, बादाम, सौंफ आदि के मिश्रण से बनाई जाती है। 

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